Jharkhand Assembly: झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र में पेश होगा 4000 करोड़ का अनुपूरक बजट कोचिंग सेंटर की मनमानी पर रोक लगेगी, गिग वर्कर्स के लिए कल्याण बोर्ड बनेगा

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रांची। दो दिन के अवकाश के बाद झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार से फिर शुरू होगा। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए करीब 4000 करोड़ रुपए का पहला अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा। इसमें 3000 करोड़ रुपए का योजना और 1000 करोड़ का गैर योजना बजट होगा। पारा शिक्षकों के लिए भी 400 करोड़ रुपए की व्यवस्था रहेगी।

5 विधेयक पेश होंगेः

इस सत्र में पांच महत्वपूर्ण विधेयक भी पेश किए जाएंगे। कैबिनेट से इन विधेयकों के प्रारूप को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। इन विधेयकों के पास होने और फिर राज्यपाल की मंजूरी के बाद जहां कोचिंग सेंटरों की मनमानी रुकेगी, वहीं गिग वर्कर्स को दुर्घटना बीमा, पेंशन और अन्य कल्याण योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।

ये विधेयक होंगे पेशः

  1. प्लेटफॉर्म आधारित गिग वर्कर्स (पंजीकरण कल्याण) विधेयक

यह कानून बनने के बाद राज्य के करीब 50 हजार गिग वर्कर्स को दुर्घटना बीमा, सामाजिक सुरक्षा पेंशन व अन्य कल्याण योजनाओं का लाभ मिलेगा। इसके लिए गिग वर्कर्स कल्याण बोर्ड और कल्याण कोष बनेगा। इनकी सेवा लेने वाले प्रतिष्ठानों को बोर्ड से उनका पंजीकरण कराना होगा। एग्रीगेटर को अपने वार्षिक टर्नओवर का 1 से 2% बोर्ड में जमा करना होगा। अनुदान, सीएसआर फंड से भी पैसे बोर्ड को मिलेंगे। इससे गिग वर्कर्स एवं उनके परिजनों को मदद दी जाएगी।

  1. झारखंड कोचिंग सेंटर (कंट्रोल एंड रेगुलेशन) विधेयक … इस अधिनियम के लागू होने से 50 से अधिक छात्रों को पढ़ाने वाले कोचिंग संस्थान इसके दायरे में आ जाएंगे। ऐसे संस्थानों को जिला स्तर की कोचिंग सेंटर रेगुलेटरी कमेटी में रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। अनियमित ढंग से बढ़ते कोचिंग सेंटर और मनमानी फीस वसूली जैसी विसंगतियों की रोकथाम के लिए सरकार ने यह विधेयक तैयार किया है। इसके लिए जिला स्तर पर डीसी की अध्यक्षता में डिस्ट्रिक्ट कोचिंग सेंटर रेगुलेटरी कमेटी ओर राज्य स्तर पर झारखंड स्टेट कोचिंग सेंटर रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन होगा।
  2. झारखंड सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम छूट विधेयक… सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) लगाने वालों को विशेष छूट देने का फैसला लिया है। इस अधिनियम के लागू होने के बाद ऐसे उद्योग लगाने के लिए तीन साल तक लाइसेंस की जरूरत नहीं पड़ेगी। किसी प्रकार की कोई फीस या टैक्स भी नहीं देना होगा। इससे उद्योगपति प्रारंभिक चरणों में प्लांट लगाने और उद्योगों के विकास पर ध्यान दे सकेंगे। क्योंकि उन्हें लंबी अनुमोदन प्रक्रिया से छूट मिलेगी।
  3. झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक… इस अधिनियम के माध्यम से राज्य के विश्वविद्यालयों में वीसी, प्रोवीसी, रजिस्ट्रार, परीक्षा नियंत्रक और वित्तीय सलाहकार जैसे पदों पर नियुक्ति का अधिकार राज्यपाल के पास न होकर मुख्यमंत्री के पास होगा। विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों व गैर शैक्षणिक पदों पर बहाली और प्रमोशन का फैसला भी राज्य सरकार करेगी। सीनेट की अध्यक्षता प्रोवीसी या उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री करेंगे।
  4. झारखंड व्यावसायिक शिक्षण संस्थान शुल्क रेगुलेशन विधेयक

निजी व व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों के शुल्क संरचना में समरूपता लाने को लेकर यह विधेयक लाया जा रहा है। मेडिकल, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट जैसे पाठ्यक्रमों की फीस को तार्किक बनाना इसका उद्देश्य है। इसके तहत फीस ढांचा तय करने के लिए शुल्क नियामक समिति का गठन होगा। सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में व्यावसायिक शिक्षा के शुल्क निर्धारण का आदेश दिया था, ताकि निजी संस्थानों की मनमानी फीस उगाही पर रोक लग सके।

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