रांची। होली का त्यौहार नजदीक है और रंगों के इस त्यौहार में एक दूसरे को गुलाल लगाया जाता है। लेकिन कभी-कभी गुलाल लगाने से त्वचा पर असर पड़ने लगता है। जिससे लोग इसका इस्तेमाल करने से डरते हैं। लेकिन अब आपको इसकी चिंता करने की जरूरत नहीं है।
क्योंकि झारखंड में महिलाएं होली के लिए प्राकृतिक विधि से हर्बल गुलाल बनाकर तैयार कर रही हैं। सिमडेगा जिले की महिलाएं होली के लिए प्राकृतिक विधि से हर्बल गुलाल बनाकर तैयार कर रही हैं। पलाश ब्रांड अंतर्गत पलाश हर्बल गुलाल तैयार किया जा रहा है।
महिलाओं के अनुसार प्राकृतिक गुलाल बनाने के लिए सूखे हुए पलाश के फूलों का प्रयोग किया जायेगा। इसमें हरा रंग बनाने के लिए सूखा हुआ पालक साग, गुलाबी रंग बनाने के लिए चुकंदर, पीला रंग बनाने के लिए हल्दी व फूल, लाल रंग के लिए फूल का प्रयोग किया जा रहा है जो पूरी तरह से प्राकृतिक है।
इस प्रकार के गुलाल त्वचा को किसी भी प्रकार से नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। सिमडेगा जिले में लगभग 200 किलोग्राम प्राकृतिक गुलाल तैयार किया जा रहा है।
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