रांची। झारखंड में पिछले कुछ वर्षों में देशी शराब की खपत में भारी कमी आई है। 2019-20 में जहां देशी शराब की खपत 116 लाख एलपीएल थी, वह 2024-25 में घटकर केवल 14.79 लाख एलपीएल रह गई है। इस गिरावट के पीछे राज्य सरकार द्वारा शराब के खिलाफ चलाए गए जागरूकता अभियानों और नशामुक्त गांवों की योजनाओं को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
विदेशी शराब और बीयर की खपत में वृद्धि
हालांकि, विदेशी शराब और बीयर की खपत में वृद्धि देखी गई है। 2019-20 में विदेशी शराब की खपत 185 लाख एलपीएल थी, जो 2024-25 में बढ़कर 201.68 लाख एलपीएल हो गई, वहीं बीयर की खपत 382 लाख बीएल से बढ़कर 457.87 लाख बीएल तक पहुंच गई है।
नशामुक्त गांवों को मिलेगा 1 लाख रुपये
राज्य सरकार ने नशामुक्त गांवों को 1 लाख रुपये का इनाम देने की योजना भी शुरू की है, ताकि शराब के सेवन में कमी लाई जा सके। इसके अलावा, शराब की बोतलों पर ‘मदिरापान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है’ का संदेश अंकित करना अनिवार्य किया गया है। 21 वर्ष से कम उम्र के लोगों के लिए शराब की बिक्री पर प्रतिबंध और अवैध शराब के निर्माण पर सख्त कार्रवाई की जा रही है।
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