रांची। पूरे देश के बाद अब झारखंड में भी परिसीमन को लेकर विवाद शुरू हो गया है। देश में पिछले एक सप्ताह से परिसीमन का विवाद तमिलनाडू को लेकर चर्चा में है। परिसीमन को लेकर केंद्र और तमिलनाडू सरकार आमने-सामने हैं। अब झारखंड में भी परिसीमन का मुद्दा उठ खड़ा हुआ है। मंगलवार को इस मुद्दे पर सदन गरमाया रहा।
इसे लेकर पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। राज्य सरकार के मंत्री-विधायकों का दावा है कि परिसीमन होने से आदिवासी सीटें घट जायेगी। वहीं, इस मुद्दे पर विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है कि राज्य में आदवासियों की संख्या कैसे घटी और मुस्लिम जनसंख्या कैसे बढ़ गई। निश्चित ही परिसीमन ऐसा मुद्दा है, जो आसानी से सुलझनेवाला नहीं लगता। पहले से ही झारखंड आरक्षण, डोमिसाइल, सरना धर्म कोड, सीएनटी-एसपीटी जैसे मुद्दों को झेल रहा है, जो आज तक अनसुलझे हैं। इसमें अब एक नया मुद्दा परिसीमन भी जुड़ गया है।
झारखंड में सत्ता पक्ष एसटी सीट नहीं घटाये जाने की मांग कर रहा है, वहीं विपक्ष का सवाल है कि आदिवासियों की संख्या क्यों घट रही है। सत्ता पक्ष का दावा है कि परिसीमन के बाद राज्य में आदिवासियों के लिए सुरक्षित लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या घट जायेगी। वहीं विपक्ष आदिवासियों की जनसंख्या क्यों कम हो रही, इसका पता लगाने के लिए एनआरसी लागू करने की दिशा में सरकार को आगे बढ़ने का सलाह दे रहा है।
राज्य के एसटी एससी ओबीसी कल्याण मंत्री चमरा लिंडा का कहना है कि आदिवासियों को खाने-पीने की चिंता नहीं है। वे तो पहाड़ों पर जंगलों में रहते हैं। कंद मूल खाना जानते हैं। लेकिन उनके सामने सबसे बड़ा अस्तित्व का संकट है। 2008 में हुए परिसीमन में एसटी के लिए सुरक्षित सीटों में छह की कमी की जा रही थी। हालांकि उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी और सोनिया गांधी के हस्तक्षेप से झारखंड में परिसीमन को स्थगित कर दिया गया। लेकिन राज्य में एक बार फिर परिसीमन लागू करने की कोशिश हो रही है।
इसमें किसी भी कीमत पर आदिवासियों के लिए सुरक्षित लोकसभा और विधानसभा की सीटों की संख्या में कमी नहीं आनी चाहिए। परिसीमन करते समय जनसंख्या को आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। क्योंकि परिसीमन आयोग की नियमावली में कहीं भी जनसंख्या को आधार बनाने की बात नहीं कही गयी है।
विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने चमरा लिंडा के बयान पर सवाल खड़ा कर दिया है कि एसटी की जनसंख्या क्यों घट रही है। उन्होंने राज्य सरकार को सलाह दी है कि वह एनआरसी लागू करने की दिशा में आगे बढे। बाबूलाल मरांडी का सवाल है कि एसटी की जनसंख्या क्यों घट रही है। मुसलमानों की जनसंख्या क्यों बढ़ रही है।
राज्य सरकार झारखंड में एनआरसी लागू करने का प्रस्ताव दे, सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा कि जनसंख्या में कमी और बढोत्तरी का कारण क्या है। उन्होंने कहा कि एसटी की सीटें नहीं घटे, इसके लिए वे भी चिंतित हैं। लेकिन जनसंख्या में हो रही कमी का दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। न सिर्फ लोकसभा, विधानसभा सीटों पर बल्कि नौकरी में भी।
उन्होंने कहा कि संथालपरगना में 17-18 फीसदी तक मुसलमानों की जनसंख्या में वृद्धि हुई है। संथालपरगना में बाहर से आये बंगलादेशियों द्वारा आदिवासी लड़कियों से शादी की जा रही है। शादी करनेवाले ऐसे 20-25 परिवार हैं जो मुखिया बन बैठे हैं।
जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होगा तो एसटी सीटें घटेंगीः रामेश्वर उरांव
कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक रामेश्वर उरांव ने परिसीमन की परिभाषा को स्पष्ट करते हुए बताया कि अगर जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होगा तो एसटी सीटें घटेंगी। इसलिए यह भी प्रयास होना चाहिए कि सीटों की संख्या बढ़े और उसमें एसटी की सीटें भी बढ़ायी जाए।
भाजपा बताए कि परिसीमन चाहती है या नहीः हेमलाल मुर्मू
झामुमो विधायक हेमलाल मुर्मू ने कहा कि परिसीमन राज्य के लिए बड़ा मुद्दा है। पिछली बार वह आयोग के मेंबर भी थे। बाद में उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। भाजपा के यह कहने से नहीं चलेगा कि अल्पसंख्यकों की जनसंख्या बढ़ रही है। वह बताए कि एसटी जनसंख्या घट रही थी तो केंद्र क्या कर रहा था। क्या भाजपा परिसीमन के लिए तैयार है।
एसटी की सीटें घटेंगी इस पर हमें चिंता करनी चाहिएः राधाकृष्ण किशोर
परिसीमन के मुद्दे पर संसदीय कार्यमंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि अल्पसंख्यकों की जनसंख्या बढ़ रही है, यह चिंता की बात नहीं होनी चाहिए। एसटी की सीटें घटेंगी, इस पर चिंता करनी चाहिे।
जब ओबीसी की जनसंख्या नहीं घटी थी तो राज्य गठन के बाद आरक्षण 27 फीसदी से घटा कर
14 फीसदी क्यों कर दिया गयाः सुदिव्य कुमार सोनू
नगर विकास मंत्री बाबूलाल मरांडी से सवाल किया कि अलग राज्य बनने पर उनकी सरकार ने अविभाजित बिहार के समय ओबीसी को मिल रहे 27 फीसदी आरक्षण को घटा कर 14 फीसदी क्यों कर दिया था। उस समय ओबीसी की जनसंख्या तो नहीं घटी थी।
परिसीमन लागू नहीं होने देंगेः डॉ इरफान अंसारी
स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने कहा कि वह परिसीमन को लागू नहीं होने देंगे। आदिवासियों के लिए सुरक्षित सीटों की संख्या में कमी नहीं आने देंगे।
इन बयानों से मतलब साफ है कि झारखंड में परिसीमन का मामला आसानी से सुलझनेवाला नहीं है। साथ ही यह भी स्पष्ट है कि यह मामला दबनेवाला भी नहीं है। इसलिए इसे लेकर अब राज्य सियासत तो गरमाती ही रहेगी।
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