MNREGA workers protest
रांची। झारखंड में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) कर्मियों ने छह महीने से लंबित वेतन भुगतान और अन्य मांगों को लेकर सोमवार से सांकेतिक हड़ताल शुरू कर दी है। राज्यभर के करीब 5,000 कर्मियों ने जिला मुख्यालयों में धरना दिया, जिससे ग्रामीण विकास योजनाओं पर असर पड़ा।
लंबित मांगों और हड़ताल का कारण
हड़ताल झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के आह्वान पर हुई। संघ ने बताया कि कर्मियों का मानदेय छह महीने से अधिक समय से भुगतान नहीं हुआ है। इसके अलावा नियमितीकरण नीति का अभाव, असमान वेतन संरचना और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था की कमी भी प्रमुख शिकायतों में शामिल हैं। इस वजह से कर्मी गंभीर आर्थिक और मानसिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
हड़ताल में ग्राम रोजगार सेवक, कनीय अभियंता, लेखा सहायक, कंप्यूटर सहायक, सहायक अभियंता और प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी सहित मनरेगा से जुड़े सभी कर्मचारी शामिल हुए। उन्होंने सरकार का ध्यान लंबित समस्याओं की ओर आकृष्ट करने के लिए अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
मानसिक और आर्थिक चुनौती
संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिरुद्ध पांडेय ने बताया कि कर्मियों को असमान वेतन और सामाजिक सुरक्षा के अभाव के कारण गंभीर आर्थिक और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। बावजूद इसके, ये कर्मी वर्षों से ग्रामीण विकास की महत्वपूर्ण योजनाओं को पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ संचालित कर रहे हैं।विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार गारंटी योजना का सही ढंग से क्रियान्वयन इन कर्मियों पर निर्भर करता है। हड़ताल के कारण कई विकास परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। इस हड़ताल को देखते हुए अधिकारियों और सरकार पर दबाव बढ़ गया है कि वे लंबित भुगतान और अन्य मांगों को जल्द पूरा करें।
सरकार और कर्मचारियों के बीच उम्मीद
कर्मियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को अनदेखा किया गया, तो हड़ताल और आंदोलन और व्यापक स्तर पर बढ़ सकता है। संघ का कहना है कि वेतन और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना ग्रामीण रोजगार योजनाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।इस हड़ताल के माध्यम से मनरेगा कर्मी अपनी समस्याओं को सार्वजनिक कर रहे हैं और सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनके आंदोलन से यह स्पष्ट होता है कि ग्रामीण विकास योजनाओं के सफल संचालन के लिए कर्मियों का समर्थन और उचित सम्मान अत्यंत आवश्यक है।








