Jharkhand PDS sugar shortage: 14 महीने से पीडीएस से नहीं मिल रही सरकारी चीनी, झारखंड के गरीबों की थाली सूनी

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Jharkhand PDS sugar shortage

रांची। झारखंड में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत मिलने वाली चीनी पिछले करीब 14–15 महीनों से उपभोक्ताओं को नहीं मिल रही है। राज्यभर के लाखों राशन कार्डधारियों, खासकर अंत्योदय परिवारों, की थाली से मिठास गायब हो गई है। त्योहारों के इस मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो गई है।

14 महीनों से नहीं मिली सरकारी चीनी

राज्य के लगभग 8.92 लाख अंत्योदय परिवारों को प्रति माह एक किलो चीनी रियायती दर पर देने का प्रावधान है, लेकिन उन्हें एक साल से अधिक समय से चीनी नहीं मिल पाई है। झारखंड में करीब 25,400 पीडीएस दुकानों के माध्यम से चीनी की आपूर्ति की जाती है, परंतु आपूर्ति ठप होने से उपभोक्ताओं को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। होली, ईद, रामनवमी और सरहुल जैसे प्रमुख त्योहार मार्च महीने में ही पड़ रहे हैं। ऐसे में लोगों को उम्मीद थी कि त्योहारों से पहले चीनी उपलब्ध कराई जाएगी, लेकिन अब तक कोई आपूर्ति नहीं हुई है।

मंत्री बोले – टेंडर में कोई भाग नहीं ले रहा

राज्य के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि विभाग की ओर से नियमित रूप से टेंडर निकाले जा रहे हैं, लेकिन कोई आपूर्तिकर्ता भाग नहीं ले रहा। उन्होंने यह भी दावा किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में चीनी की मांग कम है, जबकि शहरी क्षेत्रों में मांग अधिक है।मंत्री के अनुसार, झारखंड और बिहार से टेंडर में पर्याप्त भागीदारी नहीं हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में चीनी मिलें बंद हो चुकी हैं, जिससे आपूर्ति प्रभावित हुई है. हालांकि, बिचौलियों की सक्रियता का भी उन्होंने जिक्र किया।

डीलरों और उपभोक्ताओं में नाराजगी

चीनी की आपूर्ति ठप होने से पीडीएस डीलरों को उपभोक्ताओं की नाराजगी झेलनी पड़ रही है. फेयर प्राइस डीलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि समय पर आपूर्ति नहीं होने से दुकान पर विवाद की स्थिति बन जाती है।

उपभोक्ताओं का कहना है कि कई महीनों से वे चीनी का इंतजार कर रहे थे। होली और रमजान के अवसर पर भी चीनी नहीं मिलने से लोगों में असंतोष बढ़ा है। उनका कहना है कि त्योहारों पर मिठाई और पकवान बनाना मुश्किल हो गया है।

सरकार पर बढ़ा आर्थिक बोझ

राज्य सरकार गरीब परिवारों को एक रुपये प्रति किलो की दर से चीनी उपलब्ध कराती है, जबकि बाजार से खरीदने में 40–45 रुपये प्रति किलो तक खर्च करना पड़ता है। इस सब्सिडी के कारण सरकार पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है। फिलहाल चीनी आपूर्ति बहाल होने की कोई स्पष्ट समय-सीमा सामने नहीं आई है। ऐसे में त्योहारों के बीच गरीबों की थाली से मिठास गायब रहना तय माना जा रहा है।

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