Jharkhand Assembly Budget Session: JMM विधायक ने कांग्रेस के मंत्री को घेरा, Airlift और टेंडर घोटाले पर सदन गर्म

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Jharkhand Assembly Budget Session:

रांची। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में दो बड़े मुद्दों ने हलचल मचा दी है। इन दो मुद्दों को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरने की कोशिश की है। एक तरफ विमान हादसे के बाद सब्सिडी से इनकार और 7.5 लाख रुपये लेकर उसी विमान से Airlift किए जाने के मामले पर सवाल उठे। तो दूसरी ओर ग्रामीण विकास विभाग की टेंडर प्रक्रिया को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा। झामुमो विधायक हेमलाल मुर्मू ने इस मुद्दे पर कांग्रेस की मंत्री दीपिका पांडेय को घेरा।

Airlift मामले पर विपक्ष का हमलाः

विपक्षी विधायकों ने सदन में सवाल उठाया कि पहले तो पीड़ितों को सब्सिडी देने से इनकार किया गया। फिर 7.5 लाख रुपये लेकर उसी विमान से एयरलिफ्ट कैसे किया गया। इस पूरे मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा जा रहा है।

किस परिस्थिति में ली गई इतनी बड़ी राशिः

विधायकों का कहना था कि यदि आपात स्थिति थी तो नियमों में छूट किस आधार पर दी गई और यदि नहीं थी तो फिर इतनी बड़ी राशि किस परिस्थिति में ली गई।

टेंडर घोटाला या प्रशासनिक लापरवाही?

ग्रामीण विकास विभाग की 2024-25 की निविदा को लेकर विधायक हेमलाल मुर्मू ने अल्पसूचित प्रश्न के जरिए सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने पूछा कि सरकार के आदेश के बावजूद ग्रामीण सड़कों और पुलों की निविदा रद्द क्यों नहीं की गई।

उन्होंने यह भी कहा कि बीड वैधता की 180 दिन की अवधि समाप्त होने के बाद टेंडर रद्द करने का प्रावधान है। इसके बावजूद रद्द नहीं किया जाना कई सवाल खड़े करता है। सदन में उन्होंने तीखे अंदाज में पूछा—आखिर विभाग में पावरफुल कौन है, मंत्री या अधिकारी?

मंत्री का जवाब: विकास कार्य में देरी से बचने का निर्णयः

ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने सदन में सफाई देते हुए कहा कि टेंडर रद्द करने की अनुशंसा की गई थी। हालांकि क्षेत्रीय विधायकों की अपील पर इसे रद्द नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि यदि निविदा रद्द कर दी जाती तो पूरी प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी पड़ती। जिससे सड़क और पुल निर्माण कार्य में देरी होती। सरकार विकास कार्यों को गति देने के लिए प्रतिबद्ध है।

ग्राम सेतु योजना में राशि सीमा पर भी बहसः

विधायक अमित कुमार यादव ने ग्राम सेतु योजना के तहत पुल निर्माण के लिए अधिकतम 10 करोड़ रुपये की सीमा पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कई परियोजनाओं में पुल की लंबाई अधिक होने के कारण यह राशि पर्याप्त नहीं होती।
सरकार की ओर से भरोसा दिलाया गया कि ग्रामीण सड़क और पुल-पुलिया निर्माण के लिए बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं और लंबित योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा।

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