यूनियन चुनाव की मांग के साथ एचईसी में हो रहा विरोध तेज

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HEC protests

रांची। झारखंड की राजधानी रांची स्थित HEC (एचईसी) में यूनियन मान्यता को लेकर श्रमिक संगठनों के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है। एचईसी प्रबंधन द्वारा बिना चुनाव कराए दो यूनियनों को मान्यता देने के फैसले के बाद कई श्रमिक संगठनों ने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया है।

श्रमिक संगठनों का कहना है कि यह फैसला श्रमिक लोकतंत्र के खिलाफ है और इससे संस्थान में असंतोष का माहौल बन गया है। उन्होंने मांग की है कि यूनियन मान्यता देने से पहले पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव कराया जाना चाहिए था।

बिना चुनाव मान्यता देने पर नाराजगी

यूनियन नेताओं का कहना है कि यदि किसी संगठन को आधिकारिक मान्यता देनी थी तो इसके लिए पहले चुनाव कराया जाना जरूरी था। चुनाव के जरिए जो यूनियन श्रमिकों का बहुमत हासिल करती, उसे ही मान्यता दी जानी चाहिए थी।
श्रमिक नेताओं का आरोप है कि प्रबंधन ने बिना किसी पारदर्शी प्रक्रिया के चुपचाप दो यूनियनों को मान्यता दे दी। इससे अन्य श्रमिक संगठनों और कर्मचारियों में असंतोष बढ़ गया है। उनका कहना है कि यह निर्णय कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों को नजरअंदाज करने जैसा है।

करीब दस साल से नहीं हुए यूनियन चुनाव

श्रमिक संगठनों ने यह भी याद दिलाया कि एचईसी में आखिरी बार यूनियन चुनाव 2015 में कराया गया था। यानी लगभग दस साल से संस्थान में कोई चुनाव नहीं हुआ है।
ऐसे में बिना चुनाव कराए यूनियनों को मान्यता देना श्रमिकों के अधिकारों के साथ अन्याय बताया जा रहा है। यूनियन नेताओं का कहना है कि यूनियन चुनाव श्रमिकों का बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

प्रबंधन के फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया

Ramashankar Singh ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि प्रबंधन का यह कदम पूरी तरह से श्रमिक लोकतंत्र के खिलाफ है। उनका कहना है कि यदि किसी यूनियन को मान्यता देनी है तो पहले निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराना जरूरी है।
उन्होंने प्रबंधन से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने और जल्द से जल्द यूनियन चुनाव की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की।

कई संगठनों ने फैसले को वापस लेने की मांग की

इस मुद्दे पर कई श्रमिक संगठन एकजुट होकर विरोध कर रहे हैं। इनमें Hatia Project Worker Union, HEC Mazdoor Sangh, HEC Shramik Sangh और Janata Mazdoor Union शामिल हैं।
इन संगठनों ने प्रबंधन से मांग की है कि वह अपने फैसले को वापस ले और पारदर्शी तरीके से यूनियन चुनाव कराए। उनका कहना है कि चुनाव के बाद जिस यूनियन को श्रमिकों का बहुमत मिलेगा, उसी को आधिकारिक मान्यता दी जानी चाहिए।

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