DSPMU Pen Down Strike: DSPMU में पेन डाउन स्ट्राइक, हड़ताल से विश्वविद्यालय का कामकाज ठप

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DSPMU Pen Down Strike:

रांची। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU) में पिछले कई दिनों से शिक्षक और गैर-शैक्षणिक कर्मचारी पेन डाउन स्ट्राइक पर हैं। कर्मचारियों ने एमएसईपी (MSP) लाभ को पुनः बहाल करने की मांग को लेकर कामकाज पूरी तरह बंद कर दिया है। इस हड़ताल का सीधा असर विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों पर पड़ रहा है।

कर्मचारियों की प्रमुख मांग

कर्मचारियों का कहना है कि अप्रैल 2025 से एमएसपी लाभ बंद कर दिया गया, जिससे उनके वेतन और पदोन्नति सहित कई अन्य सेवा लाभ प्रभावित हुए हैं। उनका आरोप है कि इस निर्णय के बाद कई फाइलें अटक गई हैं और उन्हें आर्थिक व प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।शिक्षकेतर कर्मचारी संघ के सचिव रोहित सिंह ने बताया कि एमएसपी लाभ बहाली उनकी प्रमुख मांग है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक इस पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा।

हड़ताल का असर छात्रों और प्रशासन पर

पेन डाउन स्ट्राइक के कारण विश्वविद्यालय में कई महत्वपूर्ण गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। इसमें परीक्षा, परिणाम प्रकाशन, प्रमाणपत्र निर्गत करना, नामांकन प्रक्रिया और अन्य प्रशासनिक कामकाज शामिल हैं।छात्रों को जरूरी दस्तावेज और शैक्षणिक सेवाएं समय पर नहीं मिल पा रही हैं। कई विभागों में नियमित कार्यालयी कामकाज बाधित होने से अकादमिक कैलेंडर पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। छात्र और अभिभावक इस स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त कर रहे हैं।

स्थायी कुलपति की कमी से बढ़ी समस्याएं

कर्मचारियों का कहना है कि विश्वविद्यालय में स्थायी कुलपति की नियुक्ति न होने के कारण निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट दिशा-निर्देश न होने के कारण समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। वे स्थायी नेतृत्व की कमी को वर्तमान संकट की एक बड़ी वजह मान रहे हैं।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। प्रशासन और कर्मचारियों के बीच विचार-विमर्श जारी है, लेकिन फिलहाल कामकाज ठप हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हड़ताल लंबी चली, तो इसका प्रभाव पूरे शैक्षणिक सत्र और परीक्षाओं पर भी पड़ सकता है। DSPMU में पेन डाउन स्ट्राइक ने विश्वविद्यालय के सामान्य संचालन को प्रभावित कर दिया है। कर्मचारियों की मांगों और स्थायी नेतृत्व की कमी के चलते छात्रों और अभिभावकों में चिंता बढ़ती जा रही है।

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