White or brown sugar
नई दिल्ली, एजेंसियां। हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में खान-पान को लेकर अक्सर कन्फ्यूजन बना रहता है। खासतौर पर जब बात शुगर की आती है, तो लोग यह समझ नहीं पाते कि यह हमारे लिए कितनी सही या गलत है। हम अपने दिन की शुरुआत चाय या कॉफी में चीनी डालकर करते हैं और कई बार मिठाई या डेजर्ट के साथ दिन खत्म करते हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या हम जो शुगर खा रहे हैं, वह हमारे स्वास्थ्य के लिए अच्छी है या नहीं।
आजकल हेल्थ और फिटनेस को लेकर जागरूकता बढ़ने के साथ व्हाइट शुगर और ब्राउन शुगर को लेकर बहस भी तेज हो गई है। कई लोग ब्राउन शुगर को हेल्दी विकल्प मानते हैं, जबकि कुछ लोग इसे सिर्फ मार्केटिंग ट्रेंड बताते हैं। ऐसे में सही जानकारी होना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं सफेद चीनी और ब्राउन शुगर में क्या फर्क है और कौन-सा विकल्प सेहत के लिए सही रहेगा?
कैसे बनता है ब्राउन शुगर और वाइट शुगर?
दरअसल ब्राउन शुगर और वाइट शुगर दोनों ही गन्ने से बनाई जाती है। इसके सोर्स में कोई भी अंतर नहीं होता। हां थोड़ा प्रोसेस अलग जरूर होता है। ब्राउन शुगर को बनाने का सबसे जरूरी इनग्रेडिएंट होता है, मोलासेस यानी गुड़ का शीरा। यह एक ऐसा तत्व होता है जो गन्ने या शुगर बीट को रिफाइन करते समय बनता है। इस प्रोसेस में शक्कर अलग हो जाता है और मोलासेस अलग हो जाता है। सफेद शक्कर में जब मोलासेस मिलाया जाता है, तब उसे ब्राउन रंग मिलता है और इसकी थोड़ी न्यूट्रिटिव वैल्यू भी बढ़ जाती है। ब्राउन शुगर में मोलासेस की वजह से कुछ मात्रा में आयरन कैल्शियम पोटेशियम जिंक कॉपर फास्फोरस जैसे न्यूट्रिएंट्स ज्यादा हो जाते हैं।
इन दोनों शुगर में क्या फर्क है?
सफेद चीनी में मुख्य रूप से सिर्फ सुक्रोज होता है और इसमें कोई खास पोषक तत्व नहीं पाए जाते। दूसरी ओर, ब्राउन शुगर में थोड़ी मात्रा में कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स मौजूद होते हैं। हालांकि, इनकी मात्रा बहुत ज्यादा नहीं होती, लेकिन फिर भी इसे सफेद चीनी की तुलना में थोड़ा बेहतर माना जाता है।
इन दोनों शुगर से नुकसान क्या हो सकता है?
सफेद शुगर का अधिक सेवन मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोग जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है।वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज, मोटापा या स्लो मेटाबॉलिज्म से जूझ रहे लोगों को ब्राउन शुगर खाने से भी कोई खास फायदा नहीं मिलता। बता दे जिन लोगों की लाइफस्टाइल सिडेंटरी यानी जो लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं, उनके लिए ब्राउन शुगर भी उतनी ही नुकसानदायक हो सकती है जितनी सफेद शुगर है। वहीं ब्राउन शुगर में भी कैलोरी लगभग उतनी ही होती है, इसलिए इसका अधिक सेवन भी नुकसानदायक हो सकता है। ब्राउन शुगर को पाचन के लिए थोड़ा हल्का माना जाता है, लेकिन दोनों प्रकार की चीनी का सेवन सीमित मात्रा में ही करना उचित रहेगा।
क्या चाय में ब्राउन शुगर डालना सही है?
चाय-कॉफी में व्हाइट शुगर की जगह ब्राउन शुगर लेना सेहत के लिहाज से कोई बड़ा फर्क नहीं डालता है। ब्राउन शुगर डालने से चाय का स्वाद थोड़ा कारमेल जैसा हो जाता है और इसे सफेद चीनी की तुलना में थोड़ा बेहतर विकल्प माना जा सकता है। हालांकि, दोनों का ग्लाइसेमिक इंडेक्स लगभग समान होता है, इसलिए डायबिटीज के मरीजों को इसका सेवन सावधानी से करना चाहिए।सिर्फ स्वाद बदलता है, इसका कोई हेल्थ बेनिफिट नहीं है। अगर मकसद सेहत सुधारना है तो शुगर का प्रकार बदलने से ज्यादा जरूरी उसकी मात्रा कम करना है।
हेल्दी विकल्प क्या हो सकते हैं?
अगर आप चीनी का हेल्दी विकल्प ढूंढ रहे हैं, तो शहद, गुड़ और स्टेविया बेहतर विकल्प हो सकते हैं। शहद और गुड़ में एंटीऑक्सीडेंट्स और मिनरल्स होते हैं, जो शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं। वहीं स्टेविया एक नेचुरल स्वीटनर है, जो खासतौर पर डायबिटीज और वजन घटाने वालों के लिए अच्छा विकल्प माना जाता है।
दोनों प्रकार की चीनी खाने पर शरीर में समान मात्रा में इंसुलिन रिलीज होता है, जो फैट जमा करने वाला हार्मोन माना जाता है। अगर चीनी से मिलने वाली ऊर्जा खर्च नहीं होती, तो यह शरीर में फैट के रूप में जमा होने लगती है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि चाहे ब्राउन शुगर हो या सफेद, दोनों का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए।













