Vitamin D:
नई दिल्ली, एजेंसियां। सर्दियों का मौसम शुरू होते ही लोग घरों में ज्यादा समय बिताने लगते हैं, जिससे धूप का कम एक्सपोजर मिलता है और विटामिन D की कमी की संभावना बढ़ जाती है। ठंड में खासतौर पर उत्तर भारत के लोग धूप से बचते हैं, जबकि कुछ लोग यह मानते हैं कि विटामिन D की कमी केवल धूप न मिलने की वजह से होती है। लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि भारत जैसे धूप वाले देश में असली कारण लाइफस्टाइल है ऑफिस में लंबे समय तक बैठना, घर से कम निकलना, सुबह की धूप से बचना और खानपान में कमी।ध्यान देने वाली बात है कि विटामिन D की कमी सिर्फ हड्डियों को ही नहीं, बल्कि मूड पर भी असर करती है। थकान, कमजोरी, चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग्स कई बार इसी कमी के लक्षण होते हैं। सर्दी में शरीर का अधिकांश हिस्सा कपड़ों से ढका रहता है, जिससे पर्याप्त धूप नहीं मिल पाती।
विशेषज्ञों के अनुसार,
विशेषज्ञों के अनुसार, सिर्फ 10% शरीर के धूप में रहने पर पर्याप्त विटामिन D बनाने के लिए कम से कम दोपहर में 2 घंटे की धूप चाहिए होती है जो ज्यादातर लोग पूरा नहीं कर पाते।डाइट की बात करें तो प्राकृतिक रूप से विटामिन D मछली और कुछ सी-फूड में अधिक पाया जाता है, लेकिन एक सामान्य व्यक्ति रोजाना 400 IU विटामिन D पाने के लिए 5 औंस सैल्मन, 30 औंस कॉड या दो बड़े टूना के कैन नहीं खा सकता। इसी वजह से सर्दियों में डाइट से इसकी पूर्ति करना मुश्किल होता है।
ऐसे में सप्लिमेंट्स उपयोगी विकल्प बन जाते हैं:
विटामिन D3 चोलकैल्सीफेरॉल वाले ओरल सप्लिमेंट्स शरीर में जल्दी अवशोषित होते हैं और इन्हें लेना भी आसान है। ये शुगर-फ्री होते हैं, इसलिए डायबिटीज के मरीज भी इन्हें सुरक्षित रूप से ले सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियों में वे लोग जिन्हें धूप या डाइट से पर्याप्त विटामिन D नहीं मिल पाता, वे डॉक्टर की सलाह पर सप्लिमेंट्स ले सकते हैं।समय रहते विटामिन D की कमी को दूर करना जरूरी है, ताकि हड्डियों की मजबूती, इम्युनिटी और मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखा जा सके।



