Plain vs multigrain flour:
नई दिल्ली, एजेंसियां। रोटी भारतीय भोजन का अहम हिस्सा है और रोजाना कई घरों में इसका सेवन होता है। बाजार में सादा गेहूं का आटा और मल्टीग्रेन आटे दोनों विकल्प उपलब्ध हैं, लेकिन सवाल यह है कि सामान्य लोगों के लिए कौन सा आटा सेहत के लिहाज से बेहतर है। AIIMS के डॉक्टर अमरेंद्र सिंह माल्ही ने इस पर हेल्थ एक्सपर्ट राय दी है।
सादा गेहूं का आटा
डॉक्टर अमरेंद्र के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति स्वस्थ है और उसका पाचन सिस्टम सही है, तो सादा गेहूं का आटा पर्याप्त और सुरक्षित विकल्प है। इसमें आवश्यक पोषक तत्व जैसे कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, प्रोटीन, आयरन, मैग्नीशियम, फास्फोरस, जिंक और विटामिन-बी मौजूद होते हैं। नियमित आहार में यह संतुलित मात्रा में पोषण देता है।
मल्टीग्रेन आटा
मल्टीग्रेन आटा उन लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है जिनका आहार संतुलित नहीं है या जिन्हें स्वास्थ्य संबंधी विशेष समस्याएं हैं। हालांकि, बाजार में मिलने वाले अधिकांश मल्टीग्रेन आटे में केवल 5–15% अन्य अनाज शामिल होते हैं, जिससे जरूरी पोषण पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलता। डायबिटीज, मोटापा या हृदय रोग से ग्रसित लोग नियंत्रित मात्रा में मल्टीग्रेन आटा खा सकते हैं। वहीं बुज़ुर्ग या पाचन समस्याओं वाले लोगों के लिए अत्यधिक फाइबर वाला आटा नुकसानदेह भी हो सकता है।
स्वस्थ लोगों के लिए सादा गेहूं का आटा रोजमर्रा के लिए पर्याप्त और संतुलित विकल्प है। मल्टीग्रेन आटा तभी लाभकारी है जब यह सही अनुपात में तैयार किया गया हो और व्यक्ति की सेहत, उम्र और पाचन क्षमता को ध्यान में रखकर सेवन किया जाए। हमेशा डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह लेकर ही आटे का चुनाव करना चाहिए।
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