PCOS control naturally:
नई दिल्ली, एजेंसियां। PCOS यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम तेजी से बढ़ती एक आम हार्मोनल समस्या है, जो आज लाखों युवतियों और महिलाओं को प्रभावित कर रही है। इस स्थिति में शरीर में इंसुलिन और सेक्स हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है, जिसके कारण अनियमित पीरियड्स, वजन बढ़ना, चेहरे पर पिंपल, बालों का झड़ना, स्किन समस्याएं और मूड स्विंग जैसे लक्षण सामने आते हैं। हालांकि यह कोई जानलेवा बीमारी नहीं है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना गलत है, क्योंकि समय पर ध्यान न देने पर यह फर्टिलिटी और मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है।
PCOS को कंट्रोल करने में लाइफ़स्टाइल मैनेजमेंट क्यों है सबसे बड़ी कुंजी?
विशेषज्ञों के अनुसार, PCOS को संभालने की 70–80% सफलता आपकी लाइफस्टाइल पर निर्भर करती है। हेल्दी डाइट, नियमित एक्सरसाइज और स्ट्रेस मैनेजमेंट PCOS के लक्षणों को कम करने और हार्मोन बैलेंस बनाने में सबसे ज्यादा मददगार हैं। खासकर उन महिलाओं के लिए जिनका वजन बढ़ रहा हो — सिर्फ 5–10% वजन कम करने से ही ओव्यूलेशन में सुधार और पीरियड नियमित होने जैसे बड़े फायदे मिलते हैं।
डाइट में क्या रखें खास ध्यान?
पीसीओएस में शुगर, जंक फूड, बेकरी प्रोडक्ट्स, तली चीजें या पैक्ड फूड से दूरी रखना बेहद जरूरी है। ये सभी इंसुलिन लेवल बढ़ाते हैं और PCOS के लक्षणों को और खराब कर देते हैं। इसके बजाय हाई-फाइबर फूड, प्रोटीन, हेल्दी फैट्स और लो-ग्लाइसेमिक फूड्स को शामिल करना चाहिए।
स्ट्रेस मैनेजमेंट क्यों है जरूरी?
स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल बढ़ने से PCOS के लक्षण और खराब हो जाते हैं। इसलिए योग, मेडिटेशन, गहरी नींद और रिलैक्सेशन टेक्नीक्स अपनाना जरूरी है। इससे हार्मोनल बैलेंस बेहतर होता है और पीरियड भी अधिक नियमित रहते हैं।
क्या दवाइयों की जरूरत हमेशा पड़ती है?
हर पीसीओएस वाली महिला को दवाइयों की जरूरत नहीं होती। कई मामलों में सिर्फ लाइफ़स्टाइल बदलाव से ही काफी सुधार हो जाता है। हालांकि ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर सप्लीमेंट या दवाएं दे सकते हैं इसलिए बिना सलाह के कोई दवा न लें।







