Low hemoglobin symptoms
नई दिल्ली, एजेंसियां। हीमोग्लोबिन खून में पाया जाने वाला एक अहम प्रोटीन है, जो शरीर के लिए ऑक्सीजन का मुख्य वाहक होता है। यह रेड ब्लड सेल्स में मौजूद रहता है और फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुँचाता है। साथ ही, शरीर से कार्बन डाइऑक्साइड को फेफड़ों तक वापस लाने का कार्य भी करता है। हीमोग्लोबिन का सही स्तर बनाए रखना इसलिए बेहद जरूरी है, क्योंकि इसकी कमी से शरीर में थकान, कमजोरी और कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
लो हीमोग्लोबिन के कारण
हीमोग्लोबिन की कमी के कई कारण हो सकते हैं। इनमें आयरन, विटामिन बी12 या फोलिक एसिड की कमी, अत्यधिक ब्लीडिंग, असंतुलित डाइट, प्रेगनेंसी या किसी पुरानी बीमारी का असर शामिल है। गलत खानपान और पोषक तत्वों की कमी भी हीमोग्लोबिन के स्तर को प्रभावित कर सकती है।
लो हीमोग्लोबिन के लक्षण
आरएमएल हॉस्पिटल के मेडिसिन विभाग के डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. सुभाष गिरि के अनुसार, हीमोग्लोबिन कम होने पर शरीर कई संकेत देता है। लगातार थकान, कमजोरी, थोड़े काम में भी सांस फूलना, चक्कर आना और सिरदर्द इसके आम लक्षण हैं। त्वचा का पीला पड़ना, होंठों और नाखूनों का रंग फीका दिखना भी लो हीमोग्लोबिन के संकेत हैं। कुछ लोगों में दिल की धड़कन तेज होना या सीने में घबराहट महसूस होना भी देखा जाता है। इसके अलावा फोकस करने में दिक्कत, ठंड ज्यादा लगना और महिलाओं में पीरियड्स के दौरान अत्यधिक कमजोरी महसूस होना भी आम है।
गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं
लंबे समय तक हीमोग्लोबिन की कमी एनीमिया का कारण बन सकती है। इससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे अंगों के कामकाज पर असर पड़ता है। गंभीर मामलों में हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। बच्चों में शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित हो सकता है, जबकि प्रेगनेंट महिलाओं में जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है।
बचाव और उपचार
हीमोग्लोबिन का स्तर बनाए रखने के लिए आयरन, विटामिन बी12 और फोलिक एसिड से भरपूर आहार लेना जरूरी है। हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, अनार, चुकंदर और सूखे मेवे इसके लिए फायदेमंद हैं। विटामिन सी का सेवन आयरन के अवशोषण में मदद करता है। इसके अलावा, नियमित ब्लड टेस्ट कराना और डॉक्टर की सलाह लेना भी महत्वपूर्ण है।








