Kidney Disease Warning: पीठ, पेट या पैरों में दर्द? हो सकता है किडनी दे रही हो खतरे का संकेत

Anjali Kumari
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Kidney Disease Warning

नई दिल्ली, एजेंसियां। किडनी की बीमारी को अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण इतने हल्के या अस्पष्ट होते हैं कि लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। किडनी शरीर का बेहद जरूरी अंग है, जो खून को साफ करने, अतिरिक्त पानी बाहर निकालने, ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखने और हड्डियों व रेड ब्लड सेल्स के लिए जरूरी हार्मोन बनाने का काम करती है। जब किडनी धीरे-धीरे खराब होने लगती है, तब शरीर लंबे समय तक कोई साफ चेतावनी नहीं देता।

नासिक के कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. मोहन पटेल के अनुसार

मानवता अस्पताल, नासिक के कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. मोहन पटेल के अनुसार, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर किडनी खराब होने की सबसे बड़ी वजहें हैं। शुरुआती स्टेज में किडनी डैमेज होने पर न दर्द होता है और न कोई खास परेशानी महसूस होती है। यही कारण है कि इस बीमारी की पहचान अक्सर देर से होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज या हाई बीपी से पीड़ित लोगों को नियमित रूप से ब्लड और यूरिन टेस्ट कराते रहना चाहिए, चाहे वे खुद को पूरी तरह स्वस्थ ही क्यों न महसूस करें।

क्या है किडनी की समस्या?

हालांकि कुछ किडनी समस्याओं में दर्द भी हो सकता है। किडनी स्टोन, इंफेक्शन या ट्यूमर जैसी स्थितियों में दर्द उभरता है, लेकिन यह दर्द हमेशा किडनी की जगह पर ही महसूस हो, ऐसा जरूरी नहीं। कई बार इसे रिफर्ड पेन कहा जाता है, जिसमें दर्द पीठ के निचले हिस्से से शुरू होकर पेट के निचले भाग, जांघ या प्राइवेट पार्ट तक फैल सकता है। इसे यूरेट्रिक कॉलिक कहा जाता है।

इसके अलावा, लंबे समय तक रहने वाला गहरा कमर दर्द, बुखार के साथ दर्द, यूरिन में जलन या रंग में बदलाव, पेट दर्द, पैरों में सूजन या जलन और गंभीर मामलों में सीने के आसपास दर्द भी किडनी की खराबी का संकेत हो सकता है। अक्सर लोग कमर दर्द को मसल पेन समझकर टाल देते हैं, जो खतरनाक साबित हो सकता है।

डॉक्टरों का साफ कहना है कि किडनी की शुरुआती बीमारी में दर्द न होना आम बात है, लेकिन जब दर्द दिखाई दे, तो उसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और सही इलाज ही किडनी को गंभीर नुकसान से बचा सकता है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी विशेषज्ञों की राय और रिसर्च पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

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