Jharkhand government hospitals
रांची। झारखंड के सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों के लिए नया साल मुश्किलें लेकर आ सकता है। पीपीपी मोड पर रेडियोलॉजी सेवाएं दे रही हेल्थ मैप डायग्नोस्टिक प्रा. लि. का राज्य सरकार के साथ करार समाप्त हो चुका है। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कंपनी को 31 दिसंबर 2025 तक अस्थायी विस्तार दिया गया था, लेकिन अब सेवा बंद करने का नोटिस जारी कर दिया गया है। इसके बाद मरीजों को निजी जांच केंद्रों का रुख करना पड़ेगा, जहां जांच काफी महंगी होगी।
रिम्स समेत कई अस्पतालों पर असर
हेल्थ मैप रांची के रिम्स, धनबाद के एसएनएमएमसीएच और जमशेदपुर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज सहित कई जिला अस्पतालों में रेडियोलॉजी सेवाएं दे रही थी। रिम्स में एक्स-रे, अल्ट्रासोनोग्राफी, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी जांचें सीजीएचएस दरों पर होती थीं, जो निजी केंद्रों की तुलना में 40–50 फीसदी सस्ती थीं। सेवा बंद होने से रोजाना सीटी स्कैन और एमआरआई कराने वाले 60 से अधिक मरीजों पर सीधा असर पड़ेगा, खासकर ट्रॉमा, ब्रेन स्ट्रोक और इमरजेंसी मामलों में।
गरीब मरीजों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
बीपीएल और जेएसएसके श्रेणी के मरीजों को अब तक सरकारी भुगतान के तहत मुफ्त या सस्ती जांच मिलती थी। सेवा बंद होने से गरीब मरीजों को भारी आर्थिक बोझ झेलना पड़ेगा। हालांकि सरकार की ओर से सेवा विस्तार या वैकल्पिक व्यवस्था पर चर्चा चल रही है, लेकिन अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
113 करोड़ से ज्यादा की जांच सेवाएं
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, हेल्थ मैप ने पिछले 10 वर्षों में राज्यभर में 113.74 करोड़ रुपये से अधिक की जांच सेवाएं दी हैं। इसमें एपीएल मरीजों से 69.86 करोड़ और बीपीएल व जेएसएसके मरीजों की जांच के बदले सरकार से 43.87 करोड़ रुपये का भुगतान शामिल है।
कंसेशन फीस और बकाया को लेकर विवाद
प्रोक्योरमेंट कॉर्पोरेशन ने हेल्थ मैप पर कंसेशन फीस नहीं चुकाने का आरोप लगाया है। एमओयू के अनुसार, कंपनी को हर साल फीस जमा करनी थी, लेकिन 10 वर्षों में केवल 11.37 लाख रुपये जमा किए गए। वहीं, रिम्स में ही कंपनी का ढाई करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान लंबित है। इस वित्तीय विवाद के चलते अब मरीजों की जांच सेवाएं ठप होने की कगार पर हैं।

