Healthy roti benefits:
नई दिल्ली, एजेंसियां। हम सभी रोज़ाना गेहूं के आटे से बनी रोटी, पराठा या पूरी खाते हैं, लेकिन क्या यह आपकी सेहत के लिए सही है? खासतौर पर अगर आप किसी बीमारी से जूझ रहे हैं या वजन कम करना चाहते हैं, तो रोज़ाना खाई जाने वाली रोटी का चुनाव बहुत अहम हो जाता है। दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. शुभम वत्स्या ने हाल ही में एक पोडकास्ट और इंस्टाग्राम वीडियो में इस पर सलाह दी।
गेहूं की रोटी और ब्लड शुगर का असर
डॉ. वत्स्या के अनुसार, सिर्फ गेहूं की रोटी खाने से शरीर में ब्लड शुगर का स्तर तेजी से बढ़ सकता है। गेहूं एक कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट है, जिसमें शुगर के मॉलीक्यूल्स लंबी और जटिल श्रृंखलाओं में जुड़े होते हैं। हालांकि यह धीरे-धीरे पचता है, फिर भी नियमित रूप से शुद्ध गेहूं की रोटी खाने से इंसुलिन का स्तर बढ़ सकता है। डायबिटीज के मरीजों के लिए यह नुकसानदेह हो सकता है।
गेहूं की रोटी की जगह क्या खाएं
डॉ. वत्स्या ने सुझाव दिया कि अगर आप अपनी सेहत को बेहतर बनाना चाहते हैं, तो गेहूं की रोटी की जगह ज्वार, बाजरा, रागी या मल्टीग्रेन आटे की रोटियां खाएं।
- ज्वार की रोटी: डायबिटीज के मरीजों के लिए सबसे बेहतर विकल्प। यह ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करती है।
- बाजरा की रोटी: प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने और ऊर्जा देने के लिए फायदेमंद।
- रागी की रोटी: आयरन की कमी वाले लोगों के लिए खास।
- मल्टीग्रेन रोटी: अगर आप एक ही अनाज की रोटी नहीं खा सकते, तो मल्टीग्रेन आटे की रोटियां बनाकर खाएं।
रोटी सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण भोजन है। ब्लड शुगर कंट्रोल, प्रोटीन और आयरन की जरूरत को ध्यान में रखते हुए आटे का चुनाव करें। डायबिटीज या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों को गेहूं की रोटी कम करना और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प अपनाना फायदेमंद होगा। संतुलित और पोषक तत्वों से भरपूर आहार ही सेहत और लंबी उम्र का आधार है।








