Late breakfast health effects
नई दिल्ली,एजेंसियां। आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में देर से सोना और देर से उठना आम हो गया है। इसका सीधा असर हमारी खाने-पीने की आदतों पर पड़ रहा है। कई लोग सुबह का नाश्ता या तो स्किप कर देते हैं या फिर 10 बजे के बाद करते हैं। ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि क्या 10 बजे तक नाश्ता करना डायबिटीज यानी शुगर का कारण बन सकता है?
बॉडी क्लॉक और मेटाबॉलिज्म का कनेक्शन
हमारा शरीर एक बायोलॉजिकल क्लॉक के अनुसार काम करता है। सुबह उठते ही मेटाबॉलिज्म एक्टिव हो जाता है और शरीर ऊर्जा के लिए भोजन की उम्मीद करता है। अगर लंबे समय तक शरीर को खाना नहीं मिलता, तो इंसुलिन के काम करने के तरीके पर असर पड़ सकता है। हालांकि, सिर्फ देर से नाश्ता करना ही शुगर की वजह है, ऐसा कहना सही नहीं होगा।
एक्सपर्ट क्या कहती हैं?
होलिस्टिक डाइटिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. गीतिका चोपड़ा के अनुसार, ब्रेकफास्ट की टाइमिंग से ज्यादा जरूरी है उसका कंटेंट और आपकी ओवरऑल लाइफस्टाइल। उनका कहना है कि 10 बजे तक नाश्ता करने से सीधे तौर पर डायबिटीज नहीं होती। शुगर असंतुलन का संबंध इस बात से है कि आप क्या खा रहे हैं और दिनभर की आपकी दिनचर्या कैसी है।
कब बनता है खतरा?
अगर कोई व्यक्ति सुबह सिर्फ चाय पीकर रहता है और 10–11 बजे हाई-कार्ब या मीठा नाश्ता करता है, तो लंबे फास्ट के बाद ब्लड शुगर का तेजी से बढ़ना स्वाभाविक है। लंबे समय तक ऐसी आदत इंसुलिन रेसिस्टेंस का खतरा बढ़ा सकती है, खासकर प्रीडायबिटीज या PCOS से जूझ रहे लोगों में।
कैसा होना चाहिए सही ब्रेकफास्ट?
एक्सपर्ट के मुताबिक, अगर आप रात का डिनर हल्का और जल्दी करते हैं, अच्छी नींद लेते हैं और सुबह 10 बजे प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट्स से भरपूर नाश्ता करते हैं, तो यह शुगर के लिए नुकसानदायक नहीं है। ब्रेकफास्ट की टाइमिंग से ज्यादा उसकी क्वालिटी मायने रखती है। संतुलित और पोषक नाश्ता अपनाकर आप शुगर और मेटाबॉलिज्म दोनों को कंट्रोल में रख सकते हैं।

