Breast cancer risk factors: क्या मांसाहार बढ़ा रहा है ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क?ICMR स्टडी ने किया खुलासा

Satish Mehta
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Breast cancer risk factors

नई दिल्ली,एजेंसियां। ब्रेस्ट कैंसर भारत में महिलाओं के बीच तेजी से बढ़ती गंभीर बीमारियों में शामिल हो चुका है। हर साल इसके मामलों में इजाफा हो रहा है, जिससे डॉक्टर और रिसर्च संस्थान इसके पीछे छिपे कारणों को समझने की कोशिश कर रहे हैं। इसी क्रम में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की एक हालिया स्टडी चर्चा में है, जिसमें नॉन वेज डाइट और ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम के बीच संभावित संबंध की बात कही गई है।

ICMR की स्टडी के अनुसार

ICMR की स्टडी के अनुसार, जिन महिलाओं की डाइट में नॉन वेज का सेवन अधिक है, उनमें ब्रेस्ट कैंसर का खतरा तुलनात्मक रूप से थोड़ा ज्यादा पाया गया। खासतौर पर ज्यादा फैट वाली नॉन वेज चीजें, तला-भुना और प्रोसेस्ड मीट शरीर के हार्मोनल संतुलन को प्रभावित कर सकता है। स्टडी में यह भी सामने आया कि अगर नॉन वेज डाइट के साथ शारीरिक गतिविधि कम हो, नींद पूरी न हो और मोटापा बढ़े, तो जोखिम और ज्यादा बढ़ सकता है।

हालांकि, रिसर्चर्स और एक्सपर्ट्स ने यह साफ किया है कि नॉन वेज खाना सीधे तौर पर ब्रेस्ट कैंसर का कारण नहीं है। यह केवल एक “रिस्क फैक्टर” हो सकता है। यानी बीमारी के पीछे कई कारण एक साथ काम करते हैं, जिनमें जेनेटिक फैक्टर, उम्र, हार्मोनल बदलाव, मोटापा और लाइफस्टाइल शामिल हैं।

स्त्री रोग विशेषज्ञ क्या कहती इस बारे में

स्त्री रोग विशेषज्ञ बताती हैं कि नॉन वेज अपने आप में नुकसानदेह नहीं है, लेकिन असंतुलित और अनहेल्दी डाइट जरूर खतरा बढ़ा सकती है। अगर नॉन वेज को सीमित मात्रा में, उबालकर या ग्रिल करके खाया जाए और साथ में फल, सब्जियां, फाइबर व प्रोटीन शामिल हों, तो जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है।

बचाव के लिए क्या करें?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण, पूरी नींद और समय-समय पर हेल्थ चेकअप ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कम करने में अहम भूमिका निभाते हैं। यानी नॉन वेज छोड़ना जरूरी नहीं, बल्कि सही संतुलन और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना सबसे जरूरी है।

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