Passive smoking
नई दिल्ली, एजेंसियां। अक्सर लोग यह मानते हैं कि जो व्यक्ति खुद धूम्रपान नहीं करता, वह सिगरेट से होने वाली बीमारियों से सुरक्षित है। हालांकि, यह पूरी तरह सच नहीं है। अगर आप किसी और के सिगरेट या बीड़ी के धुएं के संपर्क में आते हैं, तो यह भी आपकी सेहत के लिए उतना ही खतरनाक हो सकता है। इसे ही ‘पैसिव स्मोकिंग’ या सेकेंड-हैंड स्मोक कहा जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सिगरेट के धुएं में 7,000 से अधिक जहरीले रसायन होते हैं, जिनमें से 69 सीधे तौर पर कैंसर से जुड़े हैं। यह धुआं हवा में लंबे समय तक बना रह सकता है, खासकर बंद कमरों और कारों में, जिससे खतरा और बढ़ जाता है। बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों पर इसका असर अधिक गंभीर होता है।
हृदय और रक्त वाहिकाओं पर असर
एक अध्ययन के मुताबिक, पैसिव स्मोकिंग के संपर्क में आने के मात्र 30 मिनट के भीतर रक्त वाहिकाओं पर असर शुरू हो सकता है। धुएं में मौजूद निकोटीन और कार्बन मोनोऑक्साइड धमनियों की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे वे सख्त हो सकती हैं। इससे हार्ट अटैक और कोरोनरी हार्ट डिजीज का खतरा 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।
फेफड़ों और श्वसन तंत्र को नुकसान
जो लोग कभी धूम्रपान नहीं करते, उनमें भी फेफड़ों के कैंसर का एक बड़ा कारण पैसिव स्मोकिंग है। यह फेफड़ों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाकर ऑक्सीजन के अवशोषण को कम करता है। इसके अलावा अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। सिगरेट का धुआं फेफड़ों की सफाई करने वाले छोटे-छोटे बालों (सिलिया) को भी निष्क्रिय कर देता है।
बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए ज्यादा खतरनाक
बच्चों के फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं होते, इसलिए पैसिव स्मोकिंग उनके लिए बेहद हानिकारक है। इससे कान का संक्रमण, निमोनिया और अचानक शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) का खतरा बढ़ सकता है। वहीं, गर्भवती महिलाओं में इसके कारण समय से पहले प्रसव, कम वजन वाले शिशु का जन्म और अन्य जटिलताएं हो सकती हैं।
बचाव ही सबसे बड़ा उपाय
पैसिव स्मोकिंग से बचने का सबसे प्रभावी तरीका धूम्रपान मुक्त वातावरण बनाना है। घर के अंदर धूम्रपान पर पूरी तरह रोक लगाएं और सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध कानूनों का पालन करें। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दूसरों के धुएं को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। जागरूकता और सावधानी ही आपको और आपके परिवार को गंभीर बीमारियों से बचा सकती है।
नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मेडिकल रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी बीमारी या लक्षण के लिए डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।


















