Blood diseases
नई दिल्ली, एजेंसियां। अच्छी सेहत के लिए शरीर में खून का सही स्तर और उसका सुचारु प्रवाह बेहद जरूरी है। लेकिन कई बार खून से जुड़ी बीमारियां शरीर को गंभीर रूप से प्रभावित कर देती हैं। इन्हें मेडिकल भाषा में ब्लड डिसऑर्डर कहा जाता है। समस्या यह है कि कई मामलों में इन बीमारियों का पता शुरुआती चरण में नहीं चल पाता, जिससे इलाज में देरी हो जाती है।
हेमेटो ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञों के अनुसार ब्लड डिसऑर्डर कई प्रकार के होते हैं, जिनमें एनीमिया, थैलेसीमिया और ब्लड कैंसर प्रमुख हैं। एनीमिया में शरीर में खून की कमी हो जाती है, जबकि थैलेसीमिया एक आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें मरीज को बार-बार खून चढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है। ब्लड कैंसर भी कई मामलों में जेनेटिक कारणों से जुड़ा होता है और इसका इलाज जटिल हो सकता है।
क्या हैं इसके प्रमुख लक्षण?
डॉक्टरों का कहना है कि कुछ सामान्य संकेतों के आधार पर खून की बीमारियों की पहचान की जा सकती है। इनमें लगातार कमजोरी, अत्यधिक थकान, बार-बार संक्रमण होना और शरीर में खून की कमी जैसे लक्षण शामिल हैं। बच्चों में यदि बार-बार बुखार या कमजोरी बनी रहती है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
समय पर पहचान क्यों है जरूरी?
विशेषज्ञों के मुताबिक, खासकर बच्चों में ब्लड डिसऑर्डर तेजी से बढ़ सकते हैं। यदि समय रहते जांच और उपचार शुरू न किया जाए तो बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। शुरुआती अवस्था में पहचान होने पर इलाज के बेहतर परिणाम मिलते हैं। देरी होने पर इलाज जटिल और महंगा हो सकता है।
किन कारणों से होती हैं ये बीमारियां?
एनीमिया अक्सर खराब खानपान, आयरन की कमी या पोषण की कमी के कारण होता है। वहीं थैलेसीमिया और कुछ प्रकार के ब्लड कैंसर आनुवंशिक कारणों से हो सकते हैं। थैलेसीमिया के गंभीर मामलों में स्टेम सेल या बोन मैरो ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है।
डॉक्टरों की सलाह है कि यदि ऊपर बताए गए लक्षण दिखाई दें तो तुरंत ब्लड टेस्ट कराकर विशेषज्ञ से परामर्श लें। जागरूकता और समय पर इलाज से खून की कई गंभीर बीमारियों को नियंत्रित किया जा सकता है।








