Fake jaggery kidney liver problems
नई दिल्ली, एजेंसियां। सर्दियों में खूब खाया जाने वाला गुड़ सामान्यतः सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है यह पाचन को दुरुस्त रखता है, एनर्जी देता है और नेचुरल शुगर होने के कारण ब्लड शुगर को भी बैलेंस करता है। लेकिन बढ़ती मांग का फायदा उठाकर बाजार में केमिकल से तैयार मिलावटी गुड़ तेजी से बेचा जा रहा है, जो सेहत पर गंभीर असर डाल सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक नकली गुड़ को चमकदार बनाने, वजन बढ़ाने और लंबे समय तक खराब न होने के लिए उसमें चीनी का सिरका, सिंथेटिक डाई, पेंट जैसे रंग, चूना और सल्फर डाइऑक्साइड जैसे खतरनाक केमिकल मिलाए जा रहे हैं।
फूड सेफ्टी विभाग ने क्या कहा?
फूड सेफ्टी विभाग का कहना है कि नकली गुड़ में वॉशिंग सोडा, चॉक पाउडर और मेटानिल येलो जैसे केमिकल डाई का इस्तेमाल हो रहा है। सल्फर डाइऑक्साइड जहां हड्डियों को कमजोर करता है, वहीं मेटानिल येलो कान, लिवर, आंत, दिल और नसों पर असर डालने के साथ शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाता है। लगातार सेवन करने पर यह किडनी और लिवर पर सीधा खतरा पैदा कर सकता है।
FSSAI ने लोगों की सुरक्षा के लिए कुछ आसान घरेलू परीक्षण बताए हैं, जिनकी मदद से मिलावटी गुड़ की पहचान की जा सकती है:
- वॉटर टेस्ट:
गुड़ का छोटा टुकड़ा पानी में डालें। अगर पानी का रंग बदल जाए, तो समझिए कि उसमें रंग की मिलावट है। असली गुड़ अपना रंग नहीं छोड़ता। - वॉशिंग पाउडर टेस्ट:
गुड़ को पानी में डालें। नीचे सफेद पाउडर जमा हो तो यह वॉशिंग सोडा या चॉक पाउडर की मिलावट का संकेत है। - शेप और टेस्ट:
असली गुड़ सॉफ्ट होता है और आसानी से टूट जाता है। बहुत ज्यादा हार्ड या दानेदार गुड़ में चीनी और केमिकल की मिलावट हो सकती है। स्वाद भी अत्यधिक मीठा लगता है। - हथेली टेस्ट:
गुड़ को हथेली पर रगड़ें। अगर उसमें से हल्का तेल निकलता है, तो यह मिलावटी है, क्योंकि असली गुड़ में तेल बिल्कुल नहीं होता।FSSAI की सलाह है कि लोग गुड़ खरीदते समय रंग, बनावट और गंध पर खास ध्यान दें और भरोसेमंद ब्रांड का ही गुड़ चुनें।

















