Sugar levels rise in winter
नई दिल्ली, एजेंसियां। सर्दियों का मौसम डायबिटीज के मरीजों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ठंड बढ़ते ही शारीरिक गतिविधियां कम हो जाती हैं, खानपान में बदलाव आता है और इसका सीधा असर ब्लड शुगर लेवल पर पड़ता है। एम्स के एंडोक्रोनोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजेश खड़गावत के अनुसार, सर्दियों में डायबिटीज मरीजों का शुगर लेवल बढ़ने का जोखिम सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा रहता है। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर समस्या पैदा कर सकती है।
क्या कहते है विशेषज्ञ?
विशेषज्ञ बताते हैं कि ठंड के कारण लोग बाहर निकलकर टहलना या एक्सरसाइज करना कम कर देते हैं, जिससे शरीर की इंसुलिन सेंसिटिविटी घट जाती है। इसका नतीजा ब्लड शुगर के बढ़ने के रूप में सामने आता है। इसलिए डायबिटीज मरीजों को सर्दियों में भी नियमित रूप से फास्टिंग और खाने के बाद का शुगर लेवल जांचते रहना चाहिए। हफ्ते में कम से कम दो से तीन बार शुगर टेस्ट जरूरी है।
खानपान को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। सर्दियों में मीठा और तली-भुनी चीजें खाने की इच्छा बढ़ जाती है, लेकिन डायबिटीज मरीजों को इससे बचना चाहिए। अधिक मिठास, फास्ट फूड और हाई कैलोरी डाइट अचानक शुगर लेवल बढ़ा सकती है। डाइट में प्रोटीन, फाइबर, हरी सब्जियां और विटामिन युक्त भोजन शामिल करना बेहतर रहता है।
विशेषज्ञ के मुताबिक
इसके अलावा, ठंड के डर से पानी कम पीना भी एक आम गलती है।विशेषज्ञ के मुताबिक, सर्दियों में भी शरीर को पर्याप्त पानी की जरूरत होती है। रोजाना 7–8 गिलास गुनगुना पानी पीना चाहिए। चाहें तो ग्रीन टी जैसे हेल्दी विकल्प भी ले सकते हैं।सबसे अहम बात यह है कि दवाइयों में खुद से बदलाव न करें। कई मरीज ठंड में दवाएं कम या बंद कर देते हैं, जो खतरनाक हो सकता है। दवा की मात्रा हमेशा डॉक्टर की सलाह से ही बदलें। सही खानपान, नियमित हल्की एक्सरसाइज और समय पर दवा लेकर सर्दियों में भी डायबिटीज को नियंत्रित रखा जा सकता है।

