Authentic Arsa Pitha Recipe
इंटरनेट पर ‘जेनेरिक’ रेसिपीज की भरमार है, लेकिन एक परफेक्ट Arsa Pitha Recipe (अरसा) एक कला है जो अनुभव से आती है। अगर चाशनी (Paag) थोड़ी भी इधर-उधर हुई, तो या तो अरसा तेल में बिखर जाएगा या पत्थर जैसा कड़ा हो जाएगा।
एक रांची निवासी के तौर पर, मैं आपको वह असली तरीका (Authentic Method) बता रहा हूँ जो हमारे घरों में दादी-नानी इस्तेमाल करती हैं। इसमें ‘अनुमान’ नहीं, बल्कि ‘सटीक माप’ और ‘तकनीक’ है।
यहाँ असली Arsa Pitha Recipe की “In-Depth” गाइड है, जो आपको पहली बार में ही परफेक्ट रिजल्ट देगी।

असली Arsa Pitha Recipe: वो बारीकियाँ जो कोई नहीं बताता
समय की आवश्यकता: 1 घंटा और 45 मिनट
Arsa Pitha केवल चावल और गुड़ का मिश्रण नहीं है; यह चावल की नमी (Moisture) और गुड़ के तापमान (Temperature) का खेल है। बाज़ार का सूखा चावल का आटा (Rice Flour) इस्तेमाल करने से असली अरसा कभी नहीं बनेगा।
- चावल का चयन: Arsa Pitha का पहला राज़
असली तरीका: सिर्फ अरवा चावल (Arwa Rice) का इस्तेमाल करें। उसना चावल (Parboiled) से Arsa Pitha नहीं बनता।
भिगोने का समय: चावल को कम से कम 3 से 4 घंटे भिगोएं।
सुखाना (Critical Step): पानी निथारने के बाद चावल को सूती कपड़े पर छाया में फैलाएं।
असली टेस्ट: चावल को पूरी तरह नहीं सुखाना है। जब आप चावल मुट्ठी में लें और वो हाथ में हल्का चिपके (हल्की नमी महसूस हो), तभी उसे पीसना है। इसे “ओदा” (Oda/Damp) चावल कहते हैं।
पीसना: इसे मिक्सी में पीसें और फिर मैदा चालने वाली छलनी से चाल लें। आटा हल्का गीला (Moist) होना चाहिए। अगर आटा सूख गया, तो आपका Arsa Pitha खराब हो जाएगा। - सही माप (The Golden Ratio for Arsa Recipe)
अंदाज़ से बनाने पर ही गलती होती है। हलवाई इस Arsa Pitha Recipe अनुपात को मानते हैं:
चावल का आटा: 1 किलो (ताज़ा कूटा हुआ)
गुड़: 750 ग्राम से 800 ग्राम (गुड़ की मिठास और क्वालिटी पर निर्भर करता है)
पानी: 100-150 मिली (सिर्फ गुड़ पिघलाने के लिए)
सौंफ/तिल: स्वादानुसार (असली अरसा में अक्सर सिर्फ सौंफ डाली जाती है) - ‘पाग’ (चाशनी) की पहचान: ‘गोली’ टेस्ट (The Water Test)
यहीं पर 90% लोग अपनी Arsa Pitha Recipe में गलती करते हैं।
गुड़ और पानी को कड़ाही में उबालें।
चेक कैसे करें: एक कटोरी में ठंडा पानी रखें। उबलते गुड़ की एक बूंद पानी में टपकाएं। अगर बूंद पानी में घुल जाए: कच्चा है।
अगर बूंद फैल जाए: अभी और पकाना है।
अगर बूंद पानी में जाते ही जम जाए और उंगली से उठाने पर एक नरम गोली (Soft Ball) बन जाए: यही सही समय है! (अगर यह कड़क होकर टॉफी की तरह टूटने लगे, तो पाग जल गया है, अरसा पत्थर हो जाएगा)। - मिश्रण तैयार करना (The Mixing Technique)
जैसे ही ‘सॉफ्ट बॉल’ वाला स्टेज आए, गैस तुरंत बंद करें।
अब इसमें धीरे-धीरे चावल का आटा डालें और लकड़ी के डंडे या कलछी से लगातार चलाएं।
ज़रूरी बात: सारा आटा एक साथ न डालें। कभी-कभी गुड़ की क्वालिटी के कारण थोड़ा आटा बच भी सकता है या कम पड़ सकता है। मिश्रण ऐसा होना चाहिए जो ठंडा होने पर ‘सख्त डो’ (Dough) बन जाए, गीला हलवा नहीं।
इसे थाली में निकालकर ठंडा होने दें। जब यह सहने लायक गरम हो, तभी इसकी लोई बना लें। - Arsa Pitha तलने का विज्ञान (Frying Physics)
तेल का तापमान: तेल मध्यम गरम (Medium Hot) होना चाहिए। बहुत गरम तेल: अरसा ऊपर से काला हो जाएगा, अंदर से कच्चा (लद-लदा) रहेगा।
ठंडा तेल: अरसा तेल पी लेगा और बिखर जाएगा।
एक बार में एक: शुरू में कड़ाही में सिर्फ एक अरसा डालकर चेक करें।
अरसा को कड़ाही में डालने के बाद तुरंत कलछी न लगाएं, उसे अपने आप ऊपर आने दें।
बहुत गरम तेल: अरसा ऊपर से काला हो जाएगा, अंदर से कच्चा (लद-लदा) रहेगा।
ठंडा तेल: अरसा तेल पी लेगा और बिखर जाएगा। - अगर Arsa Pitha बिगड़ जाए तो क्या करें?
समस्या: अरसा तेल में डालते ही बिखर (Dissolve) रहा है।
कारण: गुड़ की चाशनी कच्ची रह गई थी या पानी ज्यादा था।
उपाय: मिश्रण को कड़ाही में वापस डालकर धीमी आंच पर थोड़ा और पकाएं ताकि पानी सूख जाए।
समस्या: अरसा बहुत कड़ा (Hard) हो गया है।
कारण: चाशनी बहुत ज्यादा पक गई (Hard Ball stage cross हो गया)।
उपाय: अगली बार चाशनी नरम रखें। इस बार वाले को आप गर्म दूध के साथ खा सकते हैं।
अगर आप इन स्टेप्स को फॉलो करेंगे, तो आपकी Arsa Pitha Recipe कभी फेल नहीं होगी। यह झारखण्ड का पारंपरिक स्वाद है जिसे सही तकनीक से ही पाया जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ: Arsa Pitha से जुड़ी जरूरी बातें)
यहाँ Arsa Pitha को लेकर कुछ ऐसे सवाल हैं जो अक्सर लोग इंटरनेट पर सर्च करते हैं। अगर आप पहली बार यह डिश बना रहे हैं, तो यह जानकारी आपके बहुत काम आएगी।
हलांकि दोनों का स्वाद मिलता-जुलता है, लेकिन Anarsa recipe (जो बिहार और महाराष्ट्र में ज्यादा प्रचलित है) में अक्सर मावा या खसखस की कोटिंग ज्यादा होती है और उसे बनाने का तरीका थोड़ा अलग हो सकता है। झारखण्ड में इसे ठेठ देहाती तरीके से बनाया जाता है, जिसे हम शुद्ध Arsa Pitha कहते हैं। इसमें गुड़ का सोंधापन ज्यादा होता है।
अरसा केवल एक मिठाई नहीं, बल्कि शगुन है। शादी-ब्याह से लेकर बच्चे के जन्म तक, यह Jharkhand famous food हर खुशी के मौके पर शगुन के तौर पर भेजा जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी ‘शेल्फ लाइफ’ है—यह Traditional sweet of Jharkhand महीनों तक खराब नहीं होता।
जी हाँ, चीनी वाला अरसा भी बनता है, लेकिन पारंपरिक Rice flour and Jaggery pitha (चावल और गुड़ का पीठा) ही असली स्वाद देता है। गुड़ शरीर को गर्मी देता है, इसलिए सर्दियों और बारिश में गुड़ वाला अरसा ही ज्यादा पसंद किया जाता है।
अगर आप सही Arsa banane ki vidhi का पालन नहीं करेंगे, तो यह समस्या आएगी। जैसा कि हमने ऊपर बताया, इसका मुख्य कारण ‘चाशनी’ (Paag) का कच्चा रह जाना है। अगर चाशनी में पानी की मात्रा ज्यादा होगी, तो अरसा तेल पी लेगा और बिखर जाएगा। हमेशा ‘सॉफ्ट बॉल’ टेस्ट करके ही चावल का आटा मिलाएं।

