Parliament Winter Session Live:
नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन विपक्षी दलों ने कई मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा। प्रदूषण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयान “मौसम का मजा लीजिए” को विपक्ष ने निशाने पर लेते हुए संसद के मकर द्वार पर पोस्टर और बैनर के साथ प्रदर्शन किया। वहीं तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसदों ने विजय चौक से संसद तक मनरेगा के मुद्दे पर मार्च निकाला। सत्र के पहले दो दिन हंगामे के कारण स्थगित हुए थे। तीसरे दिन सदन की कार्यवाही सामान्य रही, और गुरुवार को चौथे दिन फिर से विपक्ष आक्रामक दिखा।
प्रियंका गांधी का सरकार पर निशाना
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रदूषण पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में लोग, खासकर बच्चे और बुजुर्ग, सांस लेने में कठिनाई झेल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार हर साल केवल बयान देती है, लेकिन ठोस कदम नहीं उठाती।
‘संचार साथी’ ऐप पर विवाद
सरकार द्वारा ‘संचार साथी’ ऐप की अनिवार्य प्री-इंस्टॉलेशन हटाने के फैसले के बाद बवाल जारी है। शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि ऐप को अनिवार्य बनाना निजता का हनन था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का झूठ खुलने पर उसे पीछे हटना पड़ा। वहीं संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लोकसभा में दावा किया कि ऐप के जरिए किसी प्रकार की जासूसी संभव नहीं है, और यह ऐप चोरी हुए फोन ट्रेस करने में प्रभावी रहा है।
रुपये की गिरावट पर कांग्रेस का सवाल
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत 90 पार जाने पर प्रियंका गांधी ने सरकार से सवाल पूछा। उन्होंने कहा कि जब यूपीए सरकार के समय डॉलर मजबूत हुआ था, तब भाजपा नेताओं ने तीखी आलोचना की थी। अब वे खुद क्या कहेंगे?
सपा सांसद के बयान पर विवाद जारी
सपा सांसद मोहिब्बुल्लाह नदवी के लोकसभा में दिए गए बयान “जुल्म होगा तो जिहाद होगा” पर बवाल लगातार बढ़ रहा है। बीजेपी ने इसे संविधान विरोधी और उग्र विचारधारा को बढ़ावा देने वाला बताया।
कांग्रेस और टीएमसी की दूरी?
विपक्षी गठबंधन INDIA में शामिल होने के बावजूद टीएमसी संसद में कांग्रेस से दूरी बनाती दिख रही है। संसद रणनीति पर होने वाली विपक्षी नेताओं की बैठकें अक्सर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कक्ष में होती हैं, लेकिन टीएमसी ने हाल में इन बैठकों से दूरी बनाए रखी है। यह संकेत है कि विपक्ष में भीतर ही अंदर मतभेद बढ़ रहे हैं।


















