Jharkhand municipal elections
रांची। राजधानी रांची में शहर की सरकार बनाने की कवायद तेज हो गई है। वार्डों का आरक्षण तय होने के बाद राजनीतिक दलों में भी गहमा-गहमी बढ़ गई है। सभी दल अपने-अपने स्तर से प्रत्याशियों पर निगाहें बनाए हुए हैं। इसे लेकर वार्ड लेवल कमेटियों की बैठक होनी है, लेकिन इससे पहले ही सभी वार्डों में चुनाव लड़ने के लिए नेता आगे आने लगे हैं।
कहीं बैनर-पोस्टर लगाए जा रहे हैं, तो कोई सोशल मीडिया पर अपने या अपने रिश्तेदारों के लिए कैंपेनिंग कर रहा है। कुछ वार्डों में स्थिति ऐसी हो गई है कि कभी एक पार्टी का झंडा उठाने वाले दोस्त अब एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे।
मेयर, डिप्टी मेयर की कुर्सी की जंग रोचकः
इन सबके बीच रांची के मेयर, डिप्टी मेयर की कुर्सी पर कब्जा करने के लिए सभी राजनीति दलों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। पिछले दो बार के नगर निगम चुनाव के आंकड़ों को मानें तो वर्ष 2013 और वर्ष 2018 के चुनाव में शहर पर भाजपा समर्थित उम्मीदवारों का कब्जा रहा है। मेयर और डिप्टी मेयर भाजपा के रहे। वहीं, 53 वार्डों में 27 पर भाजपा समर्थित उम्मीदवार पार्षद बने थे। जबकि दूसरे स्थान पर कांग्रेस थी। कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों ने 13 वार्डों में जीत दर्ज की थी।
तीसरे स्थान पर झामुमो थी, जिसे मात्र 9 वार्ड और चौथे स्थान पर राजद थी जिसके समर्थित उम्मीदवार 4 सीट पर जीते थे। लेकिन, नगर निकाय चुनाव नियमावली में संशोधन होने और वार्डों के आरक्षण के समीकरण को देखने से साफ है कि झामुमो इस बार भाजपा के तिलस्म को तोड़ने की पूरी तैयारी कर चुका है। कांग्रेस भी उसके साथ है। हालांकि, अभी तक भाजपा, झामुमो या कांग्रेस ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं।
एक पार्टी के कई नेता एक ही वार्ड में होंगे आमने-सामनेः
वार्डों के आरक्षण से बिगड़े समीकरण ने पार्षद बनने की मंशा पालने वाले नेताओं के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। लेकिन, नियमावली में हुए संशोधन से उनकी आस फिर बंधी है। दरअसल, नगर पालिका नियमावली में संशोधन होने से कोई भी प्रत्याशी गैर आरक्षित किसी भी वार्ड से चुनाव लड़ सकता है। ऐसे में एक ही पार्टी के कई नेता एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरेंगे।
जैसे कि वार्ड 34 से भाजपा समर्थित विनोद सिंह पार्षद बने थे। लेकिन, इस बार वार्ड 26 के पार्षद रहे अरुण झा और वार्ड 27 के पार्षद रहे ओम प्रकाश का वार्ड रिजर्व हो गया है। ऐसे में वे भी वार्ड 34 से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। इसी तरह कांग्रेस और जेएमएम के कई नेता भी एक-दूसरे के खिलाफ लड़ने की तैयारी में जुट गए हैं।
भाजपा फिर आशा पर लगा सकती है दांवः
भाजपा इस बार फिर दो बार रांची की मेयर रह चुकी आशा लकड़ा पर दांव लगा सकती है। लेकिन, मेयर की दौड़ में वार्ड नं. 7 से लगातार तीन बार पार्षद रहीं सुजाता कच्छप और दो बार पार्षद रहीं रोशनी खलखो भी मजबूती से दावेदारी पेश कर सकती हैं। हालांकि, वर्ष 2014 और 2018 में लगातार दो बार आशा लकड़ा जीत दर्ज करके मेयर बनी थीं। इसलिए पुराने चेहरे पर ही भाजपा दांव खेल सकती है। वहीं, डिप्टी मेयर के लिए वैसे प्रतिनिधि की तलाश की जा रही है, जिसकी पैठ पूरे शहर में हो।
पूर्व डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय को भी किसी दूसरी सीट से चुनाव लड़ाया जा सकता है। क्योंकि, उनके पास चुनाव लड़ने और लड़ाने का लंबा अनुभव है। भाजपा कम से कम 27 वार्डों पर कब्जा करने में सफल होती है, तभी डिप्टी मेयर के पद पर कब्जा हो सकता है। हालांकि, संभावित प्रत्याशियों ने अभी इस मामले पर चुप्पी साध रखी है।
कांग्रेस रमा खलखो को फिर ला सकती है मैदान मेः
कांग्रेस भी निगम चुनाव में पूरे दम-खम के साथ उतरने की तैयारी में है। कांग्रेस नए चेहरे के बजाय राज्य गठन के बाद वर्ष 2008 में हुए पहले नगर निगम चुनाव में जीत हासिल करने वाली रमा खलखो पर दांव खेल सकती है। दो दिन पूर्व हुई कांग्रेस की बैठक में इस पर लगभग सहमति बन गई है। इसके बाद रमा खलखो रेस हो गई हैं।
खादगढ़ा, मधुकम व अन्य क्षेत्रों में हटाए जा रहे अतिक्रमण का जायजा लेकर उन्होंने मंत्री से इस पर रोक लगाने की मांग भी की है। वहीं, डिप्टी मेयर के पद के लिए झामुमो तैयारी कर रहा है। वार्ड 18 से पार्षद का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे सांसद महुआ माजी के बेटे मजबूत दावेदार बताए जा रहे हैं।

