Javed Akhtar
जयपुर ,एजेंसियां। जावेद अख्तर, जो आज हिंदी सिनेमा के महान गीतकार और स्क्रिप्ट राइटर के रूप में जाने जाते हैं, ने हाल ही में जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में अपने शुरुआती संघर्ष के दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि फिल्म इंडस्ट्री में उनके शुरुआती दिन बहुत कठिन और चुनौतीपूर्ण थे। बड़े और प्रसिद्ध फिल्मकार बनने से पहले जावेद अख्तर को असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम करना पड़ा था। उस दौर में असिस्टेंट डायरेक्टर की पोजीशन को अपमानित करने वाली माना जाता था।
जावेद ने शुरुआती दिनों की बात शेयर की
जावेद ने बताया कि शुरुआती दिनों में उन्हें कई तरह के छोटे-छोटे और अनोखे काम करने पड़ते थे। “तुम्हारा काम क्या है? जल्दी से मैडम के जूते लेकर आओ। हीरो का कोट कहां है? जैकेट कहां है?” जैसे आदेश उन्हें दिन-प्रतिदिन सुनने पड़ते थे। इस दौरान असिस्टेंट डायरेक्टर को स्टार्स के लिए हर तरह की मदद करनी पड़ती थी, चाहे वह कपड़ों का ध्यान रखना हो या छोटे-मोटे कार्य। जावेद ने कहा कि आज का समय काफी बदल चुका है। अब असिस्टेंट डायरेक्टर स्टार्स को उनके नाम से बुलाते हैं, जबकि पहले उनकी स्थिति को अक्सर छोटा और तुच्छ समझा जाता था।
जावेद अख्तर ने अपने संघर्ष के बारे में बताते हुए कहा कि यह अनुभव उनके लिए सीखने और परिपक्व होने का मौका साबित हुआ। इस समय के दौरान उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में सब कुछ शुरू से सीखना पड़ा। कठिनाइयों और अपमान के बावजूद उन्होंने अपने काम में पूरी निष्ठा और मेहनत दिखाई। उनके इस संघर्ष ने उन्हें सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाने में मदद की।
उन्होंने आगे कहा
उन्होंने यह भी बताया कि आज जबकि वे बड़े फिल्म निर्माता और गीतकार हैं, वे जब अपने पुराने दिनों को याद करते हैं तो आश्चर्यचकित होते हैं कि उन्होंने कैसे इतनी मुश्किल परिस्थितियों में खुद को साबित किया। जावेद अख्तर का यह अनुभव यह दिखाता है कि सफलता केवल टैलेंट से नहीं, बल्कि संघर्ष और समर्पण से भी आती है।
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में जावेद अख्तर की यह बातचीत नए कलाकारों और सिनेमा के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी। उनके अनुभव ने यह साफ कर दिया कि शुरुआत में कठिनाइयाँ आना सामान्य है, लेकिन मेहनत और धैर्य के साथ उन्हें पार किया जा सकता है।


















