Storyteller Professional Training
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत में कथा वाचन का क्षेत्र तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। रामकथा, भागवत कथा और पुराणों का प्रवचन अब सिर्फ धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया और बड़े लाइव इवेंट्स के जरिए यह पेशा नए दौर में एक आकर्षक करियर बन गया है। इसी मांग को देखते हुए अब कथावाचक बनने के लिए बाकायदा प्रोफेशनल पढ़ाई और डिग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है।
कथावाचक बनने के लिए कितने ऑनलाइन कोर्स शुरू किए है ?
सबसे बड़ा कदम वाराणसी स्थित संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने उठाया है। यह देश की पहली यूनिवर्सिटी है जिसने कथावाचक बनने के लिए 10 ऑनलाइन कोर्स शुरू किए हैं। इन कोर्स में छात्रों को कथा कहने की कला, उच्चारण, भाव-प्रदर्शन, श्रोताओं से जुड़ने की तकनीक, मंच संचालन और पुराणों व हिंदू ग्रंथों की गहन समझ सिखाई जाती है। विश्वविद्यालय का मानना है कि कथावाचन केवल धार्मिक संदेश देने का माध्यम नहीं, बल्कि एक विशिष्ट कला है, जिसके लिए प्रशिक्षित शिक्षा जरूरी है।
यूनिवर्सिटी ने दो नए सर्टिफिकेट कोर्स
यूनिवर्सिटी ने दो नए सर्टिफिकेट कोर्स भी शुरू किए हैं ‘मंदिर प्रबंधन’ और ‘पुराण प्रवचन प्रवीण’। ‘मंदिर प्रबंधन’ में धार्मिक आयोजनों, मंदिर संचालन और व्यवस्थाओं का ज्ञान दिया जाता है, जबकि ‘पुराण प्रवचन प्रवीण’ में कथा वाचन की शैली, शास्त्रीय ज्ञान और आध्यात्मिक संवाद कौशल पर फोकस किया जाता है।
ये कोर्स न केवल नए छात्रों के लिए बल्कि पहले से कथा वाचन करने वालों के लिए भी करियर उन्नति में सहायक हैं।इसके अलावा देश की अन्य संस्कृत यूनिवर्सिटीज और धार्मिक संस्थान भी कथावाचन से जुड़े कोर्स शुरू कर चुके हैं। इस्कॉन का ‘श्रीमद्भागवत कथा’ कोर्स 2499 रुपये से शुरू होता है, जबकि कुछ विश्वविद्यालयों में फीस कोर्स की अवधि और विषयों के अनुसार अधिक भी हो सकती है।
कुल मिलाकर, कथावाचन अब एक पारंपरिक कला से आगे बढ़कर एक प्रोफेशनल और स्किल-आधारित करियर के रूप में सामने आ रहा है, जिसमें युवाओं के लिए अवसरों के नए द्वार खुल रहे हैं।

