नई दिल्ली | 23 जनवरी, 2026: भारत के करीब 8 करोड़ नौकरीपेशा लोगों के लिए सामाजिक सुरक्षा का नया युग शुरू हो चुका है। सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के पूरे ढांचे को बदलकर इसे डिजिटल रूप से अत्यधिक शक्तिशाली बना दिया है। Epfo 3.0 introduces upi withdrawals, new portal, and core banking system – यह सिर्फ एक तकनीकी अपग्रेड नहीं है, बल्कि करोड़ों कर्मचारियों की मेहनत की कमाई तक उनकी पहुंच को आसान बनाने का एक क्रांतिकारी कदम है।
UPI निकासी और रियल-टाइम सेटलमेंट की शुरुआत
EPFO के इतिहास में सबसे बड़ी बाधा ‘पैसे की निकासी’ में लगने वाला समय रहा है। अब तक पीएफ का पैसा बैंक खाते में आने में हफ़्तों लग जाते थे। EPFO 3.0 के साथ अब कर्मचारी सीधे UPI के जरिए अपने फंड की निकासी कर सकेंगे। यह सुविधा विशेष रूप से उन छोटे क्लेम्स के लिए है जहाँ कर्मचारियों को अचानक पैसों की जरूरत पड़ती है। अब आपको अस्पताल के बिल या बच्चों की स्कूल फीस के लिए कर्ज लेने की जरूरत नहीं होगी; आप अपने फोन से कुछ ही मिनटों में पीएफ एडवांस निकाल पाएंगे।
कोर बैंकिंग सिस्टम (CBS) से खत्म हुई भौगोलिक सीमाएं
पुराने सिस्टम की सबसे बड़ी खामी यह थी कि आपका पीएफ खाता किसी एक विशेष क्षेत्रीय कार्यालय (Regional Office) से बंधा होता था। अगर आप शहर बदलते थे, तो पीएफ ट्रांसफर करना एक सिरदर्द बन जाता था। अब पीएफ को कोर बैंकिंग सिस्टम (CBS) पर शिफ्ट कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब आपका खाता एक ‘यूनिवर्सल बैंक अकाउंट’ की तरह काम करेगा। अब आप देश के किसी भी हिस्से में हों, आपका डेटा एक ही सेंट्रलाइज्ड सर्वर पर रहेगा। इससे क्लेम रिजेक्शन की दर में भारी कमी आएगी और ऑटो-ट्रांसफर की प्रक्रिया सेकंडों में पूरी होगी।
नया पोर्टल और एआई-आधारित इंटरफेस
EPFO के पुराने पोर्टल पर हैवी ट्रैफिक के कारण अक्सर सर्वर डाउन रहने की समस्या आती थी। सरकार ने अब पूरी तरह से नया पोर्टल लॉन्च किया है। यह नया पोर्टल आधुनिक एआई (AI) टूल से लैस है जो आपकी समस्याओं को तुरंत समझता है। इसमें ‘भाषिणी‘ टूल का उपयोग किया गया है, जिससे भारत की क्षेत्रीय भाषाओं के लोग भी अपनी भाषा में पीएफ का काम कर सकते हैं। यूजर इंटरफेस को इतना सरल बनाया गया है कि कम पढ़े-लिखे लोग भी बिना किसी एजेंट की मदद के अपना क्लेम खुद भर सकेंगे।
लॉयल्टी बोनस: कर्मचारियों को मिलेगा ₹46,000 का अतिरिक्त लाभ
सिस्टम में सुधार के साथ-साथ सरकार लंबे समय से जुड़े कर्मचारियों को आर्थिक तोहफा भी दे रही है। ‘लॉयल्टी-कम-लाइफ’ बेनिफिट के तहत उन कर्मचारियों को विशेष फायदा मिलेगा जिन्होंने लगातार 20 वर्षों तक अपने पीएफ खाते में योगदान दिया है।
- किसे मिलेगा फायदा: ऐसे कर्मचारी जिनकी बेसिक सैलरी ₹15,000 तक है और जिन्होंने 20 साल की सेवा पूरी कर ली है।
- कितनी मिलेगी राशि: नियमों के अनुसार, पात्र कर्मचारियों को रिटायरमेंट के समय या स्थायी विकलांगता की स्थिति में ₹46,000 से ₹50,000 तक का अतिरिक्त बोनस दिया जाएगा।
- महत्व: यह राशि उन लोगों के लिए बहुत मददगार है जो कम वेतन के बावजूद अपनी पूरी सेवा के दौरान ईपीएफओ के साथ बने रहे। यह सरकार की ओर से एक तरह का सम्मान है।
रजिस्टरों के बोझ से डिजिटल आजादी तक का सफर
पीएफ का पुराना दौर किसी बुरे सपने से कम नहीं था। 1950 और 60 के दशक में सब कुछ कागजों पर दर्ज था। अगर किसी कर्मचारी का नाम स्पेलिंग में गलत हो जाता, तो उसे ठीक कराने में पूरी उम्र बीत जाती थी। फाइलें धूल फांकती थीं और कर्मचारी दफ्तरों के बाहर कतारों में खड़े रहते थे। EPFO 2.0 (UAN के दौर) ने हमें इंटरनेट से जोड़ा, लेकिन सिस्टम का बैकएंड अभी भी धीमा था। अब EPFO 3.0 के साथ हम ‘शून्य मानवीय हस्तक्षेप’ (Zero Human Intervention) की ओर बढ़ रहे हैं। अब कोई बाबू आपका क्लेम नहीं रोकेगा। अगर आपका डेटा सही है, तो सॉफ्टवेयर खुद उसे पास करेगा।
हर कर्मचारी के लिए यह बदलाव क्यों अनिवार्य है?
यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आपकी गाढ़ी कमाई पर आपका मालिकाना हक सुनिश्चित करता है। पहले पीएफ को सिर्फ ‘रिटायरमेंट फंड’ माना जाता था जिसे छूना मुश्किल था। अब यह आपकी ‘इमरजेंसी किट’ है। UPI के जरिए निकासी और कोर बैंकिंग के कारण अब आपका पैसा आपकी मुट्ठी में है। पारदर्शिता इतनी है कि आप अपनी पासबुक में हर महीने होने वाले जमा को लाइव देख सकते हैं।
असंगठित क्षेत्र का एकीकरण
EPFO 3.0 का अगला चरण रेहड़ी-पटरी वालों और गिग वर्कर्स (जैसे जोमैटो-स्विगी डिलीवरी बॉय) को भी इसी सिस्टम से जोड़ना है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में हर कामकाजी भारतीय के पास एक डिजिटल पीएफ सुरक्षा कवच हो, जो पूरी तरह से पारदर्शी और तेज हो।

