Cyber Crime पर बड़ी कार्रवाई: 23 लाख शिकायतें, ठगों से बचाए गए 7,130 करोड़ रुपये

Anjali Kumari
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Cyber Crime:

नई दिल्ली, एजेंसियां। देश में बढ़ते साइबर अपराध पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार ने बड़े स्तर पर सख्त कदम उठाए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत कार्यरत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की पहल से अब तक ठगों के हाथों में जाने से हजारों करोड़ रुपये की राशि बचाई जा चुकी है। मंत्रालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 31 अक्टूबर 2025 तक साइबर अपराध से जुड़ी 23.02 लाख से अधिक शिकायतों में 7,130 करोड़ रुपये से ज्यादा की वित्तीय राशि सुरक्षित की गई है।

‘नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली’

गृह मंत्रालय ने वर्ष 2021 में ‘नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली’ (CFCFRMS) की शुरुआत की थी, ताकि वित्तीय धोखाधड़ी की तुरंत रिपोर्टिंग हो सके और ठगों द्वारा रकम की हेराफेरी को समय रहते रोका जा सके। इस प्रणाली के तहत टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1930 भी शुरू किया गया, जिससे पीड़ित तुरंत शिकायत दर्ज कर सकें।

I4C के अंतर्गत एक अत्याधुनिक साइबर फ्रॉड मैनेजमेंट सेंटर (CFMC) भी स्थापित किया गया है, जहां बैंक, वित्तीय संस्थान, पेमेंट एग्रीगेटर, टेलीकॉम कंपनियां, आईटी मध्यस्थ और राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियां मिलकर रियल टाइम में कार्रवाई करती हैं। इसी समन्वय के चलते अब तक 16,840 आरोपियों की गिरफ्तारी संभव हो सकी है।

सरकार ने तकनीकी मोर्चे पर भी कड़े कदम उठाए

साइबर अपराध पर रोक लगाने के लिए सरकार ने तकनीकी मोर्चे पर भी कड़े कदम उठाए हैं। अब तक 11.14 लाख से अधिक सिम कार्ड और 2.96 लाख मोबाइल IMEI नंबर ब्लॉक किए जा चुके हैं, जिनका इस्तेमाल धोखाधड़ी में किया जा रहा था। इसके साथ ही ‘प्रतिबिंब’ जैसे डिजिटल मॉड्यूल के जरिए अपराधियों और उनके नेटवर्क की मैपिंग की जा रही है।

गृह मंत्रालय ने महिलाओं और बच्चों के खिलाफ

गृह मंत्रालय ने महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध रोकथाम योजना (CCPWC) के तहत राज्यों को 132.93 करोड़ रुपये की सहायता दी है। देश के 33 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में साइबर फोरेंसिक प्रशिक्षण लैब स्थापित की गई हैं और 24,600 से अधिक पुलिसकर्मियों, अभियोजकों और न्यायिक अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।सरकार का कहना है कि साइबर अपराध से निपटने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को और मजबूत किया जाएगा, ताकि नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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