कौन थे साइरस मिस्त्री
साइरस मिस्त्री
30 लाख करोड़ से अधिक के नेट वर्थ वाले टाटा समूह के छठे ग्रुप चेयरमैन रहे साइरस मिस्त्री अब इस दुनिया में नहीं हैं।
चार सितंबर 2022 में एक सड़क हादसे में उनका निधन हो गया था। साइरस मिस्त्री एक बड़े बिजनेस टाइकून थे।
साइरस मिस्त्री का जन्म
साइरस पालोनजी मिस्त्री का जन्म 4 जुलाई 1968 को हुआ था। वो शापूरजी पालोनजी ग्रुप के प्रमुख पालोनजी मिस्त्री के छोटे बेटे थे।
पालोनजी मिस्त्री ने आयरिश महिला से शादी की और उसके बाद वे आयरलैंड के नागरिक हो गये। साइरस मिस्त्री का जन्म भी आयरलैंड में हुआ था।
साइरस मिस्त्री का पढ़ाई
साइरस ने मुंबई के कैथेड्रल एंड जॉन कॉनन स्कूल से शुरुआती पढ़ाई की। इसके बाद वे सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए लंदन चले गए।
उनके पास लंदन बिजनेस स्कूल से मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री भी थी।
साइरस ने 1991 में अपना फैमिली बिजनेस ज्वाइन किया था। उन्हें 1994 में शापूरजी पालोनजी ग्रुप का डायरेक्टर नियुक्त किया गया।
उनके नेतृत्व में कंपनी ने भारत का सबसे ऊंचा रेसिडेंशियल टावर, सबसे लंबा रेलवे पुल और सबसे बड़े पोर्ट का निर्माण किया।
पालोनजी ग्रुप का कारोबार कपड़े से लेकर रियल एस्टेट, हॉस्पिटैलिटी और बिजनेस ऑटोमेशन तक फैला हुआ है।
दिसंबर 2012 को रतन टाटा ने टाटा सन्स के चेयरमैन पद से रिटायरमेंट ले लिया था। उसके बाद साइरस मिस्त्री को टाटा सन्स का चेयरमैन बनाया गया।
साइरस मिस्त्री बने छठे ग्रुप चेयरमैन
टाटा के 150 साल से भी ज्यादा समय के इतिहास में साइरस मिस्त्री छठे ग्रुप चेयरमैन थे।
वे टाटा सन्स के सबसे युवा चेयरमैन भी थे। साइरस के पिता पालोनजी मिस्त्री 2006 में टाटा ग्रुप के बोर्ड से रिटायर हुए थे, जिसके बाद साइरस मिस्त्री ने उनकी जगह ली थी। पालोनजी मिस्त्री टाटा ग्रुप के सबसे बड़े शेयर होल्डर थे।
अब भी मिस्त्री परिवार की टाटा सन्स में 18.4% की हिस्सेदारी है। वे टाटा ट्रस्ट के बाद टाटा सन्स में दूसरे बड़े शेयर होल्डर्स हैं।
हालांकि चार साल के अंदर ही 24 अक्टूबर 2016 को टाटा सन्स ने उन्हें चेयरमैन पद से हटा दिया था।
उनकी जगह रतन टाटा को अंतरिम चेयरमैन बनाया गया था। इसके बाद 12 जनवरी 2017 को एन चंद्रशेखरन टाटा सन्स के चेयरमैन बनाए गए थे।
इस विवाद को लेकर टाटा सन्स का कहना था कि मिस्त्री के कामकाज का तरीका टाटा सन्स के काम करने के तरीके से मेल नहीं खा रहा था।
इसी वजह से बोर्ड के सदस्यों का मिस्त्री पर से भरोसा उठ गया था।
इसे भी पढ़ें
Jharkhand Holding Tax: झारखंड में होल्डिंग टैक्सः असेसमेंट से पेमेंट तक, जानें सब कुछ









