Cigarette tax rate:
नई दिल्ली,एजेंसियां। लोकसभा ने बुधवार को ध्वनिमत से सेंट्रल एक्साइज (अमेंडमेंट) बिल, 2025 पास कर दिया, जिसके बाद तंबाकू और उससे जुड़े उत्पादों पर भारी कर बढ़ोतरी का रास्ता साफ हो गया है। अब यह बिल राज्यसभा में भेजा जाएगा। यह संशोधन बिल देश में सिगरेट, सिगार, चबाने वाला तंबाकू, जर्दा, हुक्का और पान मसाला जैसे उत्पादों पर जीएसटी कंपेंसेशन सेस के स्थान पर एक्साइज ड्यूटी लागू करने का प्रावधान करता है।
क्यों लाया गया यह बिल?
जीएसटी के साथ तंबाकू उत्पादों पर अस्थायी कंपेंसेशन सेस लगाया गया था, जिसका उद्देश्य राज्यों को राजस्व हानि की भरपाई करना था। अब यह सेस समाप्त होने वाला है। सरकार नहीं चाहती कि इसके हटने से तंबाकू उत्पादों पर टैक्स कम हो जाए, इसलिए नई एक्साइज ड्यूटी लाकर कर दरों को समान या उससे ज्यादा रखने का फैसला किया गया है।
इसके पीछे दो प्रमुख कारण हैं—
(1) तंबाकू खपत को कम करना
(2) सरकार की राजस्व आमदनी को सुरक्षित रखना
किन उत्पादों पर कितना असर?
- सिगरेट / सिगार / चुरूट: लंबाई के आधार पर प्रति 1000 स्टिक पर ₹5,000 से ₹11,000 तक एक्साइज
- चबाने वाला तंबाकू: ड्यूटी लगभग दोगुनी
- कच्चा तंबाकू: 60–70% तक उत्पाद शुल्क
- हुक्का तंबाकू: 40% तक शुल्क
- जर्दा, पान मसाला: नई ड्यूटी या बढ़ा सेस लागू
वर्तमान में तंबाकू पर 28% जीएसटी के साथ अलग-अलग सेस लगता है, जो अब एक्साइज में बदल जाएगा।
संसद में क्या हुआ?
शरद पवार गुट की सांसद सुप्रिया सुले ने बिल का समर्थन करते हुए कहा कि यह धूम्रपान कम करने में असरदार होगा, लेकिन तंबाकू किसानों के हितों की सुरक्षा भी आवश्यक है। वहीं, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह कर डिविसिबल पूल में जाएगा, यानी राज्यों को भी हिस्सा मिलेगा। उन्होंने साफ कहा-“हम नहीं चाहते कि सिगरेट किफायती रहे।”सीतारमण ने बताया कि भारत में सिगरेट पर कुल टैक्स बोझ 53% है, जबकि WHO का मानक 75% है, इसलिए टैक्स बढ़ाना जरूरी है।यह बिल पास होने के बाद सिगरेट, पान मसाला और तंबाकू उत्पादों की कीमतें बढ़नी तय हैं।







