UGC bill controversy: UGC बिल पर सियासत तेज, नीतीश कुमार की JDU ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर जताया भरोसा

Juli Gupta
3 Min Read

UGC bill controversy:

पटना, एजेंसियां। यूजीसी के नए नियमों (UGC Equity Regulations 2026) को लेकर देशभर में जारी विरोध और सियासी बयानबाजी के बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने अपना रुख साफ कर दिया है। पार्टी के प्रवक्ता और विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार ने कहा कि समाज के किसी भी तबके में उपेक्षा या नाराजगी का भाव लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है। उन्होंने इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अंतिम और सर्वमान्य बताया।

संविधान और लोकतंत्र का हवाला

नीरज कुमार ने कहा कि भारत का संविधान डॉ. भीमराव आंबेडकर ने बनाया है, जिसमें हर नागरिक को अपनी बात रखने का अधिकार दिया गया है। ऐसे में किसी भी वर्ग की आशंकाओं और भावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार “न्याय के साथ विकास और सबका सम्मान” की राजनीति के प्रतीक हैं और JDU इसी विचारधारा पर चलती है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भरोसा

JDU प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि यूजीसी के नए रेगुलेशन को लेकर अलग-अलग तरह की टिप्पणियां सामने आ रही हैं और मामला अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुका है। ऐसे में न्यायपालिका का सम्मान करते हुए सभी पक्षों को कोर्ट के निर्णय का इंतजार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका जो भी फैसला देगी, वही सबके लिए मान्य होगा।

क्यों हो रहा है UGC गाइडलाइंस का विरोध

UGC Equity Regulations 2026 इसी महीने लागू किए गए हैं। इन नियमों में ओबीसी वर्ग को भी जातिगत भेदभाव की परिभाषा में शामिल किया गया है। इसके अलावा झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर जुर्माना या निलंबन जैसे प्रावधानों को हटा दिया गया है। इसी को लेकर सामान्य वर्ग के कुछ संगठनों का आरोप है कि इन नियमों का दुरुपयोग हो सकता है और गलत शिकायत करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका

इन नए नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका में मांग की गई है कि मौजूदा स्वरूप में इन नियमों के लागू होने पर रोक लगाई जाए और जाति-आधारित भेदभाव को संविधान के अनुरूप, जाति-तटस्थ तरीके से परिभाषित किया जाए। साथ ही यह भी मांग की गई है कि समान अवसर केंद्र और हेल्पलाइन सभी वर्गों के लिए बिना भेदभाव के उपलब्ध हों।

Share This Article