Nitish Kumar Hijab Controversy: इस्लाम में हिजाब की अहमियत और नियम

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Nitish Kumar Hijab Controversy

पटना, एजेंसियां। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 15 दिसंबर को आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र देने के दौरान एक मुस्लिम महिला डॉक्टर के चेहरे से उसका हिजाब खींच दिया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस घटना के बाद मुख्यमंत्री की जमकर आलोचना हो रही है। मुस्लिम धर्म गुरुओं ने नीतीश कुमार से इस हरकत के लिए माफी मांगने की मांग की है।

इस्लाम में हिजाब महत्व

इस्लाम में हिजाब को बेहद महत्व दिया गया है। पवित्र कुरान के अनुसार, ईमानदार पुरुषों को अपनी निगाहें नीची रखनी चाहिए और अपने गुप्तांगों की रक्षा करनी चाहिए। इसी तरह, महिलाओं को भी अपनी आंखें नीची रखना, गुप्तांग और आभूषण दिखाने से बचना, सिर और सीने को ढकना आवश्यक है। महिलाओं का चेहरा केवल अपने पति के सामने दिखाना उचित माना जाता है।

हिजाब पहनना सिर्फ शरीर को ढकना नहीं

मुस्लिम महिलाओं के लिए हिजाब पहनना सिर्फ शरीर को ढकने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अल्लाह की इच्छाओं के प्रति सम्मान और सार्वजनिक रूप से अपनी आस्था, पहचान और आज्ञाकारिता को दर्शाने का तरीका भी है। हिजाब पहनना सांस्कृतिक, पारिवारिक और व्यक्तिगत कारणों पर निर्भर करता है और आमतौर पर 12-13 वर्ष की उम्र के आसपास यौवन में शुरू किया जाता है।

एक महिला हिजाब केवल निजी स्थानों जैसे कमरे या बाथरूम में, या अपने जीवनसाथी और करीबी परिवार के सामने उतार सकती है। इसके अलावा मां, बहन, बेटी, भतीजी या अन्य महिला सदस्यों के साथ होने पर, या आपातकालीन/चिकित्सीय कारणों से भी हिजाब उतारना संभव है। इस घटना ने हिजाब और इस्लाम में इसके महत्व पर नई बहस छेड़ दी है और धार्मिक व सामाजिक दृष्टि से इसके नियमों पर ध्यान दिलाया है।

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