Bihar nuclear power plant: बिहार में लगेगा न्यूक्लियर पावर प्लांट? सर्वे पूरा, बांका के ये इलाके सबसे आगे

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Bihar nuclear power plant

पटना, एजेंसियां। बिहार में परमाणु ऊर्जा परियोजना को लेकर बड़ी प्रगति हुई है। Nuclear Power Corporation of India Limited (एनपीसीआईएल) ने राज्य में न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाने के लिए प्रारंभिक सर्वे पूरा कर लिया है। सर्वे में बांका जिले के शंभुगंज और भितरिया क्षेत्र को सबसे उपयुक्त पाया गया है।

शुक्रवार को पटना के विद्युत भवन में ऊर्जा सचिव मनोज कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई हाई-लेवल बैठक में एनपीसीआईएल और NTPC Limited (एनटीपीसी) की टीमों ने अपनी रिपोर्ट साझा की। इसे बिहार में ‘एटॉमिक एनर्जी’ के नए दौर की शुरुआत के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

बांका के शंभुगंज और भितरिया क्यों आगे?

सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, बांका जिले के शंभुगंज और भितरिया में आबादी अपेक्षाकृत कम है और जमीन पथरीली है, जो भारी संरचना वाले परमाणु संयंत्र के लिए अनुकूल मानी जाती है। इन स्थानों ने नवादा के रजौली और सिवान के संभावित स्थलों को पीछे छोड़ दिया है। हालांकि सिवान में सर्वे अभी जारी है।

पानी की उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती

न्यूक्लियर पावर प्लांट के संचालन के लिए भारी मात्रा में पानी की जरूरत होती है, विशेषकर रिएक्टर को ठंडा रखने के लिए। रिपोर्ट में बताया गया है कि चयनित स्थलों पर फिलहाल स्थायी जल स्रोत की कमी है।

इस समस्या के समाधान के लिए दो प्रमुख विकल्पों पर विचार किया जा रहा है:

  • Ganga से पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाना।
  • नेपाल से आने वाली नदियों के पानी को संरक्षित करने के लिए बड़े जलाशयों का निर्माण।
    राज्य सरकार ने आश्वासन दिया है कि जल आपूर्ति और तकनीकी अवसंरचना के विकास में हरसंभव सहयोग दिया जाएगा।

भूकंप जोन और सुरक्षा पर फोकस

सिवान जिले का संभावित स्थल भूकंपीय जोन में होने के कारण अतिरिक्त सुरक्षा जांच की जरूरत होगी। परमाणु परियोजनाओं में सुरक्षा मानक सर्वोच्च प्राथमिकता होते हैं, ताकि किसी भी तकनीकी गड़बड़ी का असर आम लोगों तक न पहुंचे।

2047 तक 100 गीगावाट का लक्ष्य

भारत सरकार ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसी योजना के तहत हर राज्य में कम से कम एक परमाणु संयंत्र स्थापित करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में प्रस्तावित यह प्लांट राज्य के औद्योगिकीकरण को गति देगा और राष्ट्रीय ऊर्जा ग्रिड को भी मजबूती प्रदान करेगा, खासकर तब जब 2035 तक देश में बिजली की मांग 446 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है।

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