हजारीबाग का अर्थ 'हजार बागों का शहर' माना जाता है, लेकिन इतिहासकार इसे 'हजार बाघों का शहर' (Tigers) कहते हैं। औपनिवेशिक काल में यह इलाका घने जंगलों और बाघों के लिए प्रसिद्ध था।
शहर से 72 किमी दूर स्थित यह प्राकृतिक झरना भारत का सबसे गर्म स्रोत है। – तापमान: 87°C (190°F) – विशेषता: इसमें सल्फर की मात्रा अधिक है, जो त्वचा रोगों में सहायक है।
हजारीबाग के 'इसको' गांव में 10,000 साल पुरानी गुफा पेंटिंग मिली हैं। यह सिंधु घाटी सभ्यता से भी प्राचीन है और प्रागैतिहासिक मानव की खगोलीय समझ को दर्शाती है।
द्वितीय विश्व युद्ध (1942) के दौरान हजारीबाग में जर्मन नागरिकों (महिलाओं और बच्चों) के लिए एक 'पेरोल कैंप' बनाया गया था। यह वैश्विक इतिहास का एक दुर्लभ हिस्सा है।
2020 में हजारीबाग की पारंपरिक कला सोहराई और खोवर को भौगोलिक संकेत (GI Tag) मिला। यह कला मुख्य रूप से आदिवासी महिलाओं द्वारा दीवारों पर बनाई जाती है।
यहाँ 3000 ईसा पूर्व के मेगालिथ (विशाल पत्थर) पाए गए हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, प्राचीन जनजातियाँ इनका उपयोग सूर्य की दिशा और मौसम ट्रैक करने के लिए करती थीं।
कोनार बांध (1955) DVC के चार प्रमुख बांधों में से दूसरा था। यह अपनी प्राकृतिक सुंदरता और इंजीनियरिंग के लिए महत्वपूर्ण है।
कैनरी हिल के नीचे तीन कृत्रिम झीलें हैं। इन्हें ब्रिटिश काल के दौरान शहर को एक 'लेक डिस्ट्रिक्ट' जैसा लुक देने के लिए बनाया गया था।
पर्यावरणविद् बुलू इमाम ने 1991 में इसकी स्थापना की। यह झारखंड की रॉक आर्ट और पाषाण युग के औजारों का सबसे बड़ा संग्रह केंद्र है।
यह भारत के सबसे पुराने अभयारण्यों में से एक है। बाघों की संख्या कम होने के बावजूद, यह चीतल (Spotted Deer) और सांभर के संरक्षण के लिए आज भी महत्वपूर्ण है।