वाराणसी, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश का वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन अब अत्याधुनिक सुरक्षा तकनीकों से लैस हो रहा है। महाकुंभ के दौरान उपयोग किए गए आधुनिक उपकरणों की सफलता ने रेलवे सुरक्षा को एक नई दिशा दी है, और अब इसे और भी उन्नत बनाया जा रहा है। इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
प्रमुख रूप से फेस रिकॉग्निशन सिस्टम (एफआरएस) का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो न केवल अपराधियों की पहचान करेगा, बल्कि उन्हें पकड़कर जेल तक भी पहुंचाएगा।
प्रतिदिन एक लाख तक लोग वाराणसी कैंट से करते हैं सफर
वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन को वाराणसी का सबसे महत्वपूर्ण स्टेशन माना जाता है, जहाँ प्रतिदिन 80,000 से लेकर 1 लाख तक यात्री यात्रा करते हैं। महाकुंभ के दौरान यह संख्या दोगुनी से भी अधिक हो गई थी। इस भारी भीड़ और सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण स्टेशन को सुरक्षित रखने के लिए रेलवे प्रशासन ने बड़े अपडेट किए हैं। अब, स्टेशन परिसर में प्रवेश और निकासी के लिए अलग-अलग प्वाइंट बनाए जा रहे हैं, और सुरक्षा को और बेहतर बनाने के लिए 6 नए मेटल डिटेक्टर लगाए जा रहे हैं।
सुरक्षा में आधुनिक उपकरणों का समावेश
अपर सुरक्षा आयुक्त बीपी सिंह ने बताया कि स्टेशन की सुरक्षा को और बेहतर करने के लिए कई बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। इसके तहत, स्टेशन परिसर में एंट्री और एग्जिट प्वाइंट को सीमित किया जा रहा है। इसके अलावा, पहली बार डोर मेटल डिटेक्टर का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो अब तक के हाथ मेटल डिटेक्टर से कहीं अधिक प्रभावी है। इन डोर मेटल डिटेक्टरों के माध्यम से स्टेशन पर आने वाले सभी यात्रियों की चेकिंग की जाएगी, जिससे सुरक्षा की स्थिति और भी मजबूत होगी।
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